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Renergen Company News: सिर्फ एक डॉलर में खरीदी निर्जन जमीन, उसके बाद जो निकला फटी रह गईं आंखें

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Renergen Company News: सिर्फ एक डॉलर में खरीदी निर्जन जमीन, उसके बाद जो निकला फटी रह गईं आंखें

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Helium Gas Reserve: कभी कभी कुछ ऐसा होता है जिस पर आप खुद यकीन नहीं कर पाते. कुछ ऐसा ही हुआ साउथ अफ्रीका के स्टार्ट अपर रेनरजेन के साथ. वर्जीनिया के पास इस स्टार्टअप ने एक डॉलर में जमीन खरीदी. स्टॉर्टअप फर्म रेनरजेन को यकीन था कि यहां पर उसे गैस रिजर्व के रूप में कुछ संसाधन मिल जाएंगे जिसके जरिए वो अपने माइनिंग एक्स्प्लोरेशन को आगे बढ़ाएगा. फर्म के इंजीनियरों ने उस जमीन पर ड्रिलिंग का काम शुरू किया. ड्रिलिंग के दौरान जो उन्हें पता चला कि यह जमीन तो उनके लिए जैकपॉट की तरह है. दरअसल उन्हें हिलियम गैस का बड़ा भंडार मिला जिसकी कीमत खरबों में है.

रेनरजेन के हाथ लगा जैकपॉट

रेनरजेन की सीईओ स्टीफैनो मरानी के मुताबिक साल 2013 में उन्होंने 1 डॉलर अदा कर जमीन खरीदी थी. जब उन्हें पता चला कि जमीन के अंदर हीलियम गैस का भंडार है तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. दरअसल हीलियम गैस के कई बड़े फायदे हैं. बड़ी बात यह है कि इस गैस का उत्पादन दुनिया के सिर्फ 10 देशों में होता है. इस गैस का महत्व आप इस बात से समझ सकते हैं कि इसका इस्तेमाल ना माइक्रोचिप के लिये कूलेंट के तौर पर होता है बल्कि एमआरआई स्कैनिंग मशीनों में होता है और आज जमान माइक्रोचिप का है.

करीब 12 बिलियन क्यूबिक फीट का रिजर्व

रेनरजेन का कहना है कि उसे एक तरह से सोने का खजाना मिल गया. वर्जीनिया के इस छोटे से हिस्से में करीब सात बिलियन क्यूबिक फीट हीलियम गैस है जिसकी कीमत चार बिलियन डॉलर के करीब है. यही नहीं अगर कुछ और संभावित रिजर्व को भी जोड़ लें तो हीलियम गैस का रिजर्व 12 बिलियन क्यूबिर फीट तक जा सकता है. कंपनी ने जनवरी 2023 में पहली बार संयंत्र से सफलतापूर्वक तरल हीलियम का उत्पादन किया. हालांकि हीलियम कोल्ड बॉक्स की वैक्यूम सील में रिसाव की वजह से जनवरी के बाद उत्पादन बंद हो गया. लेकिन उम्मीद है कि फरवरी 2024 से वो एक बार फिर हीलियम गैस को बड़े पैमाने पर निकाल सकेंगे. 

हीलियम उत्पादन में अमेरिका आगे

रेनरजेन के सीओओ निक माइकल का कहना है कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतना बड़ा भंडार उन्हें मिलने वाला है. लेकिन अब जबकि यह साफ हो चुका है कि जमीन के इस टुकड़े में हीलियम का इतना भंडार है तो उससे ना सिर्फ उनके माइनिंग एक्स्प्लोरेशन में मदद मिलेगी बल्कि वो वैश्विक स्तर पर हीलियम गैस के वो सबसे बड़े प्रोड्यूसर होंगे. कंपनी का कहना है कि कुछ जगहों पर हीलियम गैस के परत की मोटाई 3 तो कुछ जगहों पर 12 फीसद के करीब है. अगर अमेरिका से तुलना करें तो हम बहुत आगे हैं. अमेरिका इस समय दुनिया में सबसे बड़ा हीलियम प्रोड्यूसिंग देश है लेकिन वहां भी हीलियम गैस कंसंट्रेटेड फॉर्म में सिर्फ .35 फीसद है. इसके बाद कतर का नंबर आता है.

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