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WEF: भारत और दुनिया के लिए ‘गलत सूचना’ सबसे बड़ा तात्कालिक खतरा, डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट में दावा

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WEF: भारत और दुनिया के लिए ‘गलत सूचना’ सबसे बड़ा तात्कालिक खतरा, डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट में दावा

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Misinformation biggest immediate risk for India, world; extreme weather top long-term threat: WEF study

विश्व आर्थिक मंच
– फोटो : wef

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भारत और अमेरिका समेत विभिन्न देशों में अगले दो साल में करीब 300 करोड़ लोगों के चुनाव में शामिल होने की संभावना है। ऐसे में गलत सूचना और सामाजिक ध्रुवीकरण दुनिया के सामने सबसे बड़े तात्कालिक जोखिमों में से एक बनकर उभरा है।

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने अपनी वार्षिक ‘वैश्विक जोखिम रिपोर्ट’ (Global Risks Report) में कहा कि अकेले भारत के मामले में ,’गलत और अधूरी सूचना’ अगले दो साल में सबसे बड़ा खतरा है। इसके बाद संक्रामक रोग, अवैध आर्थिक गतिविधि, आय की असमानता और श्रम की कमी पांच सबसे बड़े अल्पकालिक जोखिमों में शामिल हैं।   

दस साल की बात करें तो सबसे बड़ा वैश्विक जोखिम मौसम में चरम बदलाव की घटनाओं से हो सकता है। रिपोर्ट में एक वैश्विक जोखिम परिदृश्य के बारे में चेतावनी दी गई है जिसके अनुसार मानव विकास में प्रगति सुस्त हो सकती है। डब्ल्यूईएफ ने कहा, ”ग्लोबल पावर डायनामिक्स, जलवायु, प्रौद्योगिकी और जनसांख्यिकी में प्रणालीगत बदलावों की पृष्ठभूमि में, वैश्विक जोखिम दुनिया की अनुकूलन क्षमता को उसकी सीमा तक खींच रहे हैं।”

दावोस में 15 जनवरी से शुरू हो रही डब्ल्यूईएफ की पांच दिवसीय वार्षिक बैठक से पहले जारी रिपोर्ट में तर्क दिया गया है कि तत्काल वैश्विक मुद्दों पर सहयोग और जोखिमों को संबोधित करने के लिए नए दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

 

ज्यूरिख इंश्योरेंस ग्रुप और मार्श मैकलेनन के साथ साझेदारी में तैयार की गई इस रिपोर्ट में सितंबर 2023 में सर्वेक्षण किए गए 1,400 से अधिक वैश्विक जोखिम विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के दिग्गजों के विचारों को ध्यान में रखा गया है।

दो साल की अल्पकालिक अवधि में, रिपोर्ट ने ‘गलत सूचना या अधूरी सूचना’ को सबसे बड़ा जोखिम माना है, इसके बाद शीर्ष पांच जोखिमों में चरम मौसम की घटनाएं, सामाजिक ध्रुवीकरण, साइबर असुरक्षा और  अंतर-राज्य सशस्त्र संघर्ष शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, “बांग्लादेश, भारत, इंडोनेशिया, मैक्सिको, पाकिस्तान, ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई अर्थव्यवस्थाओं में अगले दो साल में करीब तीन अरब लोगों के चुनाव में शामिल होने की संभावना है, ऐसे में गलत सूचना और अधूरी सूचना का व्यापक इस्तेमाल और इसे प्रसारित करने के उपकरण नवनिर्वाचित सरकारों की वैधता को कमजोर कर सकते हैं।”

इसमें कहा गया है, “परिणामस्वरूप अशांति, हिंसक प्रदर्शनों, घृणा अपराधों, नागरिक टकराव और आतंकवाद जैसी घटनाएं हो सकती हैं। डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे-जैसे सूचनाओं में सच्चाई घटेगी, घरेलू प्रचार और सेंसरशिप का खतरा भी बढ़ेगा।”

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