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वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी
– फोटो : अमर उजाला
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भारतीय वायुसेना स्वदेशी तकनीक पर जोर दे रही है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने कहा कि आत्मनिर्भर बनने के प्रयासों का बेहतरीन परिणाम भी सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दो-तीन साल के दौरान कई ऐसे सैन्य उपकरण हैं, जिन्हें भारत में डेवलप किया गया है। वायुसेना प्रमुख ने बताया कि भारत में बनाए गए उपकरणों को वायुसेना ने हर कसौटी पर खरा पाया उसके बाद इसे वायुसेना के बेड़े में शामिल भी किया गया। उन्होंने बताया कि पिछले दो-तीन साल में विकसित ऐसे स्वदेशी उपकरणों की संख्या लगभग 60 हजार है।
अब 60 हजार से अधिक तकनीक स्वदेशी
पिछले दो से तीन वर्षों में 60,000 से अधिक उपकरणों घटकों (Components) का स्वदेशीकरण करने के संबंध में एयर चीफ मार्शल ने यह भी कहा कि वायु सेना मरम्मत और ओवरहॉल रखरखाव (overhaul maintenance) के लिए हमेशा विदेशी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। उन्होंने यह टिप्पणी नागपुर के भोंसला मिलिट्री स्कूल में कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान की।
आत्मनिर्भर बनना समय की मांग
वायुसेना प्रमुख के मुताबिक विदेशी ओईएम यानी ऐसी कंपनी जो उपकरणों की मूल निर्माता (Original Equipment Manufacturers) हैं, उन पर भारत हमेशा के लिए भरोसा नहीं कर सकता। बदलती परिस्थितियों में वायुसेना का मानना है कि मरम्मत और ओवरहॉल मेंटेनेंस जैसी कई चीजों के मामले में आत्मनिर्भर बनना होगा।
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