Home World Nepal China Relations: मालदीव के बाद अब नेपाल भी भर रहा चीन के साथ दोस्‍ती का दम, पीएम प्रचंड का बड़ा बयान

Nepal China Relations: मालदीव के बाद अब नेपाल भी भर रहा चीन के साथ दोस्‍ती का दम, पीएम प्रचंड का बड़ा बयान

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Nepal China Relations: मालदीव के बाद अब नेपाल भी भर रहा चीन के साथ दोस्‍ती का दम, पीएम प्रचंड का बड़ा बयान

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One China Policy: भारत का करीबी रहा मालदीव अब लगातार चीन से मधुर संबंध बनाने की कोशिशों में लगा है. इस बीच भारत का एक और पड़ोसी देश नेपाल बीजिंग से दोस्ती बढ़ाने की कोशिश करता दिख रहा है.  प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ ने रविवार को नेपाल के  ‘वन चाइना पॉलिसी’ का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि  हिमालयी राष्ट्र ताइवान की आजादी के खिलाफ है. गौरतलब है कि मालदीव भी वन चाइना पॉलिसी के प्रति समर्थन जता चुका है. 

काठमांडू में चीनी नव वर्ष समारोह के उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा, ‘नेपाल पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की सरकार को पूरे चीन का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र कानूनी सरकार के रूप में मान्यता देता है, और ताइवान चीन के क्षेत्र का एक अविभाज्य हिस्सा है.’ गौरतलब है कि चीन ताइवान पर दावा जताता रह है कि ताकत के बल पर उसे हासिल करने की भी कह चुका है. 

इस देश ने तोड़ा चीन से राजनयिक नाता 
यह बयान ऐसे समय में आया है नाउरू की सरकार ने ताइवान की सरकार से संबंध तोड़ने का ऐलान किया है. नाउरू की सरकार ने घोषणा की कि ‘अब [ताइवान] को एक अलग देश के रूप में नहीं, बल्कि चीन के एक अभिन्न अंग के रूप में मान्यता देगी.’ ताइवान ने इस कदम के समय को ‘देश लोकतांत्रिक चुनावों के खिलाफ चीन का प्रतिशोध’ बताया.  नाउरू के इस फैसले के बाद केवल 12 देश ही बचे हैं जो अभी भी ताइपे के साथ राजनयिक संबंध बनाए हुए हैं, जिनमें ग्वाटेमाला, पैराग्वे और मार्शल द्वीप शामिल हैं.

मालदीव का वन चाइन पॉलिसी को समर्थन
हाल ही में चीन की यात्रा पर गए राष्ट्रपति मुइज्जू ने वहां कहा कि मालदीव वन-चाइना नीति का दृढ़ता से पालन करता है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की सुरक्षा में दृढ़ पारस्परिक समर्थन मालदीव-चीन संबंधों के निरंतर और मजबूत विकास के लिए एक ठोस आधार है. 

ताइवान के चुनाव नतीजे से चीन नाराज
गौरतलब है कि हाल ही में ताइवान के चुनाव में वोटर्स ने संप्रभुता समर्थक उम्मीदवार विलियम लाई को अपना अगला राष्ट्रपति चुना. इस चुनाव नतीजे से बीजिंग खासा नाराज हो गया. बीजिंग नेलाई को अतीत में ताइवान की स्वतंत्रता के समर्थन में की गई टिप्पणियों के लिए ‘उपद्रवी’ तक कह चुका है.

(इनपुट – एजेंसी)

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