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Air Defense System: ईरान ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादी संगठन जैश अल-अदल के ठिकानों पर मंगलवार को हमले किए. ईरान ने हमले के लिए मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल किया. जैश अल-अदल सुन्नी आतंकवादी समूह है जो ज्यादातर पाकिस्तान से अपनी गतिविधियों को अंजाम देता है. इसके बाद किरकरी से बचने के लिए पाकिस्तान भी तैश में आ गया. उसने गुरुवार को ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में आतंकी ठिकानों पर सैन्य हमले किए, जिसमें नौ लोग मारे गए. इस ऑपरेशन का कोड नाम – “मार्ग बार सरमाचर” था. फारसी भाषा में “मार्ग बार” का मतलब है मौत जबकि बलूच भाषा में सरमाचर का मतलब गुरिल्ला है.
ताकत में कोई देश नहीं कम
एक तरफ पाकिस्तान के पास ढेरों परमाणु मिसाइलें हैं. वहीं ईरान भले ही परमाणु संपन्न देश ना हो लेकिन ताकत में वह कमतर नहीं है. मगर जो बात गौर करने वाली है वो ये है कि दोनों ही देशों ने एक-दूसरे के घर में घुसकर बम गिराए लेकिन सवाल उठ रहा है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम उस वक्त क्या कर रहे थे.
एयर डिफेंस सिस्टम उस वक्त एक्टिवेट होता है, जब एयरस्पेस में किसी दुश्मन देश का विमान या ड्रोन घुस आए. रडार इनको इंटरसेप्ट करती है और मिसाइल उसका पीछा कर उसे ध्वस्त कर देती है. लेकिन ना तो ईरान और ना ही पाकिस्तान की तरफ से ऐसा कोई बयान आया कि उसने दूसरे देश के विमान को मार गिराया हो. ऐसा भी नहीं है कि पाकिस्तान और ईरान के पास एयर डिफेंस सिस्टम या रडार ना हो.
पहले बात करते हैं ईरान की
ईरान के पास Bavar-373 लॉन्ग रेंज रोड मोबाइल सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम है, जिसका अनावरण अगस्त 2016 में किया गया था. ईरान इसे रूस के एस-300 मिसाइल सिस्टम का प्रतिद्वंदी बता चुका है. ईरान की डिफेंस मिनिस्ट्री ने स्थानीय मैन्युफैक्चर्स और यूनिवर्सिटीज के साथ मिलकर इसको डेवलप किया है. 22 अगस्त 2019 में इसको ऑपरेशनल घोषित कर दिया गया था. साल 2022 में इसका अपग्रेडेड वर्जन सामने आया, जिसको ईरान ने एस-400 के बराबर बताया. ईरान ने कहा था कि यह पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट को भी मार गिराने में सक्षम है.
जब रूस ने एस-300 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को ईरान को एक्सपोर्ट करने पर बैन लगा दिया तब ईरान ने इसी तरह का मिसाइल डिफेंस सिस्टम बनाने की सोची. हालांकि 2015 में यह बैन हटा दिया गया था. ईरान के तत्कालीन डिफेंस चीफ ने दावा किया था कि Bavar-373 टारगेट या प्लेन को 300 किलोमीटर दूर से डिटेक्ट, 250 किमी पर लॉक और 200 किमी पर नष्ट कर सकता है. अप्रैल 2022 में रिपोर्ट्स सामने आई थीं, जिसमें दावा किया गया था कि Bavar-373 सिस्टम को ईरान ने रूस को यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल के लिए दिया था. लेकिन पाकिस्तान के अटैक के बाद उसके इस डिफेंस सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
पाकिस्तान के पास चीन का एयर डिफेंस सिस्टम
अब बात करते हैं पाकिस्तान की. पाकिस्तान अकसर अपने हथियार और डिफेंस सिस्टम अपने सबसे सबसे जिगरी दोस्त चीन से खरीदता है. साल 2021 में पाकिस्तान की आर्मी ने चीन में बने HQ-9 सरफेस टू एयर मिसाइल (SAM) सिस्टम को अपनी सेना में शामिल किया था. साल 2019 में जब भारतीय वायुसेना के विमानों ने पीओके के बालाकोट में घुसकर एयरस्ट्राइक की थी. जिस पर पाकिस्तान तिलमिला उठा. उसके बाद से ही वह अपने एयरस्पेस को सुरक्षित करने के रास्ते खोजने में लगा है. ISPR के मुताबिक, HQ-9/P एक इंटीग्रेटेड एयर एंड मिसाइल डिफेंस नेटवर्क है. फिलहाल कितने HQ-9/P सेट सर्विस में हैं, इसका पता नहीं चल पाया है. जानकारी के मुताबिक HQ-9/P 100 किमी के दायरे में आने पर एयरक्राफ्ट पर हमले करता है. पाकिस्तान का दावा है कि एक शॉट में ही यह दुश्मन का काम तमाम कर देता है. लेकिन क्रूज मिसाइलों के खिलाफ एंगेजमेंट रेंज करीब 25 किमी की है.
लेकिन हैरानी की बात ये है कि विमानों को मार गिराने की तकनीक होने के बावजूद दोनों देशों के विमान एक-दूसरे के एयरस्पेस में आए और अपने-अपने लक्ष्यों को भेदकर वापस लौट गए और उनके एयर डिफेंस सिस्टम सिर्फ देखते ही रह गए. अब देखना होगा कि भविष्य में दोनों देशों की ये ‘लड़ाई’ किस ओर करवट लेती है.
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