Home Breaking News Gaza War: गाजा में संघर्ष विराम का आदेश देने से ICJ ने किया इनकार; कहा- इस्राइल नुकसान को रोकने का प्रयास करे

Gaza War: गाजा में संघर्ष विराम का आदेश देने से ICJ ने किया इनकार; कहा- इस्राइल नुकसान को रोकने का प्रयास करे

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Gaza War: गाजा में संघर्ष विराम का आदेश देने से ICJ ने किया इनकार; कहा- इस्राइल नुकसान को रोकने का प्रयास करे

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अंतरराष्ट्रीय अदालत, हेग
– फोटो : PTI

विस्तार


इस्राइल और हमास के हिंसक संघर्ष में अब तक 26 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। पश्चिम एशिया में गहराते मानवीय संकट का कारण 110 दिनों से अधिक समय से जारी युद्ध है। ताजा घटनाक्रम द हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (ICJ) की टिप्पणी से जुड़ा है। दुनिया की सबसे बड़ी अदालत में नागरिकों की मौत रोकने की बात हुई। अदालत ने कहा, फलस्तीनी इलाके में हो रही मौत और नुकसान को कम करने के लिए इस्राइल को हरसंभव प्रयास करने चाहिए। दक्षिण अफ्रीका की तरफ से दायर याचिका में कहा गया कि 1948 में नरसंहार पर अंकुश के लिए संयुक्त राष्ट्र में समझौते (UN Genocide Convention) को स्वीकृति दी गई थी। इस्राइल ने इसका उल्लंघन किया है।

आईसीजे के अध्यक्ष जोन डोनॉग्यू (सी) ने 26 जनवरी को हेग में नरसंहार के आरोप वाले मामले में कहा, 17 न्यायाधीशों के एक पैनल ने मामले को खारिज नहीं करने का निर्णय लिया है। इस बहुप्रतीक्षित फैसले में आईसीजे ने कहा, फलस्तीनि जनता का जीवन प्रतिकूल परिस्थितियों में है। तत्काल बुनियादी सेवाओं और मानवीय सहायता के प्रावधान जरूरी हैं। इस्राइल को प्रभावी उपाय करने चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत ने कहा कि नरसंहार बंद करने के लिए प्रत्यक्ष और सार्वजनिक उकसावा खत्म होना चाहिए। दोषियों को दंडित करने के लिए इस्राइल को अपनी शक्ति के भीतर ही सभी उपाय करने चाहिए। अपने अंतरिम फैसले में आईसीजे ने स्वीकार किया कि पूरे मामले पर विचार करने में कई साल लग सकते हैं। सुनवाई के दौरान इस्राइल ने नरसंहार के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। 

ICJ के फैसले के बाद राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और दक्षिण अफ्रीका की गवर्निंग पार्टी ने खुशी का इजहार किया। दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा, ‘आज का दिन अंतरराष्ट्रीय कानून की दृष्टि से निर्णायक जीत और फलस्तीनी लोगों को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। अब गाजा में फलस्तीनी लोगों के खिलाफ नरसंहार के गंभीर खतरे पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस फैसले के बाद सभी देशों पर इस्राइल की सैन्य कार्रवाइयों का समर्थन न करने का नैतिक दबाव बनेगा।

इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ICJ के फैसले को ‘अपमानजनक’ बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने पहले भी कहा था कि वह अदालत के कारण बंधे हुए महसूस नहीं करते। नेतन्याहू ने हमास को नेस्तनाबूंद करने की कसम के साथ कहा, ‘कोई भी हमें नहीं रोक सकता। न हेग, न एक्सिस ऑफ एविल न ही कोई और।’ नेतन्याहू के मुताबिक इस्राइल अपने देश की रक्षा के लिए जो भी जरूरी होगा, करना जारी रखेगा।

बता दें कि इस्राइल और हमास का हिंसक संघर्ष पिछले साल शुरू हुआ था। सात अक्तूबर, 2023 को इस्राइल पर हमास के हमले के बाद इस्राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) के जवान गाजा पट्टी पर हमास के आतंकी ठिकानों पर लगातार बमबारी कर रहे हैं। हिंसक संघर्ष में अब तक 26 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। बीते 21 जनवरी को आई रिपोर्ट में गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 24 घंटे में 178 लोगों की मौत का दावा किया था।

मरने वाले और घायलों की संख्या

गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक सात अक्तूबर से शुरू हुए संघर्ष में अब तक 26 हजार से अधिक फलस्तीनी लोगों की मौत हुई है। 62,600 से अधिक लोग घायल हुए हैं। इस्राइली सेना के मुताबिक उसने लगभग 9000 आतंकियों को ढेर कर दिया है। हालांकि, उसने इसका कोई प्रमाण नहीं दिया है। सघन आबादी और आवासीय इलाकों में युद्ध के कारण हताहतों में आम लोगों की संख्या काफी अधिक है। इस्राइली सेना (IDF) के मुताबिक हमले की शुरुआत के बाद 195 सैनिक मारे गए हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमास को जड़ से मिटाने तक हमला बंद नहीं करने की कसम खाई है। इस्राइल के मुताबिक लगभग 130 लोग हमास के कब्जे में हैं। अनुमान के मुताबिक लगभग 100 लोग ही जीवित बचे हैं।

गहराते मानवीय संकट पर चिंता

गौरतलब है कि 1948 में इस्राइल गठन के समय से ही शरणार्थी शिविर हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक गाजा की लगभग 85 फीसदी आबादी अपने घरों को छोड़कर भाग चुकी है। हजारों लोग दक्षिणी हिस्से में संयुक्त राष्ट्र के आश्रय और शिविर में शरण लिए हुए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ-साथ रेस्क्यू में लगे यूएन अधिकारियों के मुताबिक 2.3 मिलियन की एक चौथाई आबादी भूख से मर रही है। युद्धग्रस्त इलाकों में मानवीय सहायता पहुंचाने में भी देरी हो रही है।

युद्धविराम के बाद बंधकों की रिहाई

यह भी रोचक है कि बीते साल नवंबर में अमेरिकी खुफिया एजेंसी- CIA के प्रमुख- विलियम जे बर्न्स, इस्राइल की खुफिया एजेंसी- मोसाद के चीफ- डेविड बार्निया और कतर के प्रधानमंत्री सह विदेश मंत्री- मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी की मौजूदगी में हुई उच्च स्तरीय बैठक में सशर्त युद्धविराम हुआ था। इसमें हमास ने फलस्तीनी कैदियों की रिहाई के बदले बंधकों को रिहा किया था। युद्ध के बीच ये जानना भी अहम है कि फ्रांस और अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, इटली और कनाडा सरीखे देश भी इस्राइल के साथ हैं।

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