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Pakistan: बलूचिस्तान में विद्रोहियों के हमले में 15 की मौत, बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली हमले की जिम्मेदारी

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Pakistan: बलूचिस्तान में विद्रोहियों के हमले में 15 की मौत, बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली हमले की जिम्मेदारी

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15 killed in rebel attack in Balochistan Baloch Liberation Army took responsibility for the attack

बलूच लिबरेशन आर्मी
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार


पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान क्षेत्र में सोमवार देर रात एक अलगाववादी आतंकवादी हमले में दो नागरिकों सहित 15 लोगों की मौत हो गई।

पाकिस्तान सेना की इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस एजेंसी (आईएसपीआर) ने कहा कि आतंकवादियों ने बलूचिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत में माच और कोलपुर परिसरों पर हमला किया। आईएसपीआर ने कहा, आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा बलों को तुरंत तैनात कर दिया गया है। प्रमुख बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने हमले की जिम्मेदारी ली है। समूह का लक्ष्य खनिज समृद्ध बलूचिस्तान के लिए स्वतंत्रता प्राप्त करना है, जो क्षेत्र के हिसाब से पाकिस्तान का सबसे बड़ा, लेकिन जनसंख्या के मामले में सबसे छोटा प्रांत है।

बीएलए से कांपती है पाकिस्तान सेना

बता दें कि बलूचिस्तान में दो प्रमुख कबीले हैं- मारी और बुगती। बीएलए पर इन्हीं दोनों का प्रभुत्व है। कहा जाता है कि कई इलाकों में इनका भय इतना ज्यादा है कि पाकिस्तानी सेना जमीन पर उतरने का साहस नहीं कर पाती, इसलिए केवल हवाई हमले करती है। कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि बीएलए के लड़ाकों को रूस की पूर्व खुफिया एजेंसी केजीबी से प्रशिक्षण मिला है। 

पाकिस्तान से अलग होना चाहते हैं बलूच

पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवर उल हक काकर ने पिछले सप्ताह शनिवार को स्वीकार किया कि बलूचिस्तान के लोग सिर्फ असंतुष्ट नहीं हैं, बल्कि अलग देश की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान में पहली बार किसी नेता ने बलोचों की आकांक्षा को स्वीकार किया है। बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, काकर ने साक्षात्कार के दौरान बलूचिस्तान में लोगों के जबरन गायब किए जाने के मुद्दे पर भी चर्चा की। उन्होंने चुनौतियों को स्वीकार करते हुए गायब लोगों की वापसी पर ध्यान केंद्रित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान के लोग अलग पहचान चाहते हैं, यही समस्या की जड़ है। इससे पहले शायद ही किसी पाकिस्तानी नेता ने इस पहलू को स्वीकार किया है। यह बयान पिछली सरकारों के एक अलग नजरिये को दर्शाता है, जो बलूचिस्तान स्वतंत्रता आंदोलन को अल्पसंख्यकों की चिंता के रूप में व्यक्त करते थे।

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