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संसद
– फोटो : सोशल मीडिया
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केंद्र सरकार अगले हफ्ते संसद में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली से सख्ती से निपटने के लिए एक नया विधेयक पेश कर सकती है। प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वाले दोषियों को अधिकतम 10 साल की जेल और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने की तैयारी है। सोमवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024 को पेश किया जा सकता है। हालांकि इस पर अंतिम फैसला होना बाकी है। गौरतलब है कि इस बिल को हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
संगठित अपराध, माफिया होंगे निशाने पर
बिल से जुड़े सूत्रों की मानें तो प्रस्तावित कानून के निशाने पर वे लोग होंगे, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली करते हैं। यह बिल अनिवार्य रूप से संगठित अपराध, माफिया तत्वों और उनके साथ सरकारी अधिकारियों सहित मिलीभगत में पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। विधेयक में एक उच्च स्तरीय तकनीकी समिति का भी प्रस्ताव है, जो कम्प्यूटरीकृत परीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए सिफारिशें देगी। गौरतलब है कि यह संयुक्त प्रवेश परीक्षा और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए परीक्षाओं सहित प्रतियोगी परीक्षाओं की भी निगरानी करेगा।
परीक्षा में गड़बड़ी से सख्ती से निपटेंगे- द्रौपदी मुर्मू
बजट सत्र की शुरूआत में संसद की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सरकार परीक्षाओं में धांधली के संबंध में युवाओं की चिंताओं से अवगत हैं। इसलिए इस तरह की समस्याओं से सख्ती से निपटने के लिए एक नया कानून बनाने का फैसला लिया गया है। सूत्रों की मानें तो परीक्षा पेपर लीक एक राष्ट्रव्यापी समस्या के तौर पर उभरी है। इसलिए केंद्रीय कानून की जरूरत महसूस की गई है। गुजरात जैसे कुछ राज्यों ने इस खतरे से निपटने के लिए कानून बनाए हुए हैं। गौरतलब है कि राजस्थान में शिक्षक भर्ती परीक्षा, हरियाणा में ग्रुप-डी पदों के लिए सामान्य पात्रता परीक्षा (सीईटी), गुजरात में कनिष्ठ क्लर्कों के लिए भर्ती परीक्षा और बिहार में कांस्टेबल भर्ती परीक्षा सहित अन्य परीक्षाएं पिछले साल प्रश्नपत्र लीक होने के बाद रद्द कर दी गई थीं।
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