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Indian Economy: पिछले नौ वर्षों में तेजी से बढ़ी अर्थव्यवस्था, मोदी सरकार के दूरदर्शी फैसलों का दिखा असर

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Indian Economy: पिछले नौ वर्षों में तेजी से बढ़ी अर्थव्यवस्था, मोदी सरकार के दूरदर्शी फैसलों का दिखा असर

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Indian economy grow impressively due to series of structural reforms in past nine years Budget 2024

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार


लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार आज अंतरिम बजट पेश करेगी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल का अंतिम बजट है। 2014 से मोदी सरकार के पिछले नौ वर्षों के कार्यकाल में त्वरित संरचनात्मक सुधारों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावशाली ढंग से बढ़ी है। कोविड महामारी और उसके बाद की वैश्विक राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद मोदी सरकार की दूरदर्शी फैसलों और विवेकपूर्ण कार्रवाई ने भारत की आर्थिक स्थिरता को मजबूत किया है। यह कारण है कि दुनिया भर में अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत के आर्थिक विकास को सराहा है। आईएमएफ का कहना है कि भारत दुनिया में सबसे तेजी से विकास करने वाले देश के रूप में उभरा है। डिजिटलीकरण और बुनियादी ढांचे जैसे प्रमुख क्षेत्रों में आर्थिक सुधारों के कारण भारत वैश्विक विकास में 16% से अधिक योगदान कर सकता है।

आर्थिक मोर्चे पर प्रमुख उपलब्धियां

भारत की वास्तविक जीडीपी ने वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही (अप्रैल-सितंबर 2023) में 7.7 फीसदी की वृद्धि दर्ज की, जो दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक है। पहली तिमाही  में भारत की वास्तविक जीडीपी 7.8 फीसदी बढ़ी और दूसरी तिमाही में 7.6 फीसदी बढ़ी। वर्ष 2023-24 में, साल-दर-साल के आधार पर जीडीपी 7.2 फीसदी की दर से बढ़ी। भारत के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने 2023-24 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.3 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। आईएमएफ ने मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अपना विकास अनुमान बढ़ाकर 6.7 फीसदी कर दिया है, जो पहले 6.3 फीसदी था। 

भारत का आर्थिक परिदृश्य काफी बेहतर

वहीं, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के आर्थिक आउटलुक में 2024 के लिए ज्यादा विकसित अर्थव्यवस्थाओं के लिए वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि 0.7-1.7 फीसदी की सीमा में और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए लगभग चार फीसदी होने का अनुमान है। हालांकि, कई संकेतकों से पता चलता है कि भारत का आर्थिक परिदृश्य काफी बेहतर है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती और लचीलापन बना हुआ है। भारतीय शेयर बाजार पहली बार वैश्विक स्तर पर चौथे सबसे बड़े इक्विटी बाजार के रूप में हांगकांग को पीछे छोड़ दिया है। 

मानव विकास में उल्लेखनीय प्रगति

भारत के आर्थिक बुनियादी सिद्धांतों की मजबूती के साथ-साथ मानव विकास में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। नीति आयोग के अनुसार, पिछले नौ वर्षों में लगभग 25 करोड़ भारतीय गरीबी से बाहर आ गए हैं और गरीबी दर में भारी गिरावट आई है, जो 2013-14 में 29.17 फीसदी से घटकर 2022-23 में 11.28 फीसदी रह गई है। 

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