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Paytm Payments Bank: Praveen Khandelwal
– फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht
विस्तार
देश के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन, कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने रिजर्व बैंक द्वारा ‘पेटीएम पेमेंट बैंक’ पर लगाई गई पाबंदियों का समर्थन किया है। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने कहा, इस मामले में व्यापारियों और पेटीएम ग्राहकों को सचेत होकर आरबीआई की पाबंदियों के प्रभाव को समझना जरूरी है। देश में डिजिटल पेमेंट करने वाले उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ऐसी निगरानी आवश्यक है। वर्तमान में, फिनटेक सेक्टर में जिस प्रकार से बड़ी कंपनियां, नियमों एवं कानूनों की धता बता रही हैं, उनका उल्लंघन कर रही हैं, ऐसे में केंद्रीय बैंक का यह आदेश बाजार की अखंडता को मजबूत करता है।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पेटीएम पर लगाई गई पाबंदियां, व्यापारियों एवं ग्राहकों के हित में हैं। रिजर्व बैंक का यह कड़ा निगरानी वाला कदम, देश में सभी के द्वारा नियम और विनियमों का पालन करने की आवश्यकता पर बल देता है। यह एक्शन प्रधानमंत्री मोदी के उस दृष्टिकोण की स्पष्टता को जाहिर करता है, जिसमें कहा गया है कि नियम न मानने वाला चाहे कितना ही बड़ा क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
प्रवीन खंडेलवाल के अलावा कैट के दिल्ली प्रदेशाध्यक्ष विपिन आहूजा ने कहा, फिनटेक इकोसिस्टम में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए रिजर्व बैंक एवं सरकार प्रतिबद्ध है। वित्तीय क्षेत्र की अखंडता और स्थिरता को बनाए रखने के लिए ऐसी निगरानी आवश्यक है। खासतौर पर ऐसे लोगों के लिए, जो कानून का पालन न करने के आदी हैं। कैट के पदाधिकारियों के अनुसार, रिजर्व बैंक का यह कदम एक निगरानीय हस्तक्षेप है। उपभोक्ताओं की सुरक्षा को बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी। डिजिटल वित्तीय प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों के विश्वास को बनाए रखने के लिए आरबीआई के इस निर्णय को एक प्रोएक्टिव कदम के रूप में देखा जा रहा है।
मौजूदा परिस्थितियों में केंद्रीय बैंक का यह आदेश, बाजार की अखंडता को मजबूत करता है। पेटीएम पर प्रतिबंध, बड़ी कंपनियों के बीच जवाबदेही की आवश्यकता को हाइलाइट करता है। ग्राहकों को किसी प्रकार का कोई नुकसान न हो, रिजर्व बैंक ने इसलिए 29 तारीख तक का समय तय किया है। खंडेलवाल ने कहा, पेटीएम के मामले में स्पष्टता की कमी ने लोगों की चिंता बढ़ाई है। इससे यह प्रतीत होता है कि नियामक संरचनाओं में हर समय अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है। ऐसा हस्तक्षेप उपयोगकर्ताओं को अधिक सशक्त बनाता है। उपभोक्ता सुरक्षा सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। इसे प्राप्त करने में निगरानीय पर्यवेक्षण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रिजर्व बैंक का यह आदेश उन सभी बड़ी कंपनियों के लिए एक चेतावनी है कि वे अपने ग्राहकों के साथ कोई खेल न खेलें। अगर वे ऐसा कुछ करती हैं तो उन्हें कड़ी कार्रवाई के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
पेटीएम की पेरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशन ‘ओसीएल’ ने अपने बयान में कहा है कि पेटीएम पेमेंट बैंक, सभी नियमों का पालन करेगा। इस दिशा में आरबीआई के निर्देशों पर तेजी से काम हो रहा है। बहुत जल्द, वन97 कम्युनिकेशन, पेटीएम पेमेंट्स बैंक के साथ नहीं, बल्कि दूसरे बैंकों की मदद से काम करेगा। कंपनी द्वारा थर्ड पार्टी बैंकों के साथ अपने मौजूदा संबंधों का विस्तार किया जाएगा। ऐसे में पेटीएम का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ता, अपनी मौजूदा राशि का इस्तेमाल करना जारी रख सकते हैं। ओसीएल की ऑफलाइन मर्चेंट भुगतान नेटवर्क पेशकश, जिसमें पेटीएम क्यूआर, पेटीएम साउंड बॉक्स व पेटीएम कार्ड मशीन, पहले की भांति जारी रहेगी। आरबीआई की पाबंदी का असर, कंपनी के शेयरों पर भी पड़ा है। पेटीएम के शेयर पर लोअर सर्किट लगा हुआ है। इसमें करीब बीस फीसदी की गिरावट दर्ज की जा रही है। शुक्रवार दोपहर को पेटीएम का शेयर 487.20 रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। पिछले छह सप्ताह में यह सबसे बड़ी गिरावट है। पेटीएम के पास डिजिटल पेमेंट बाजार का करीब 17 फीसदी हिस्सा है।
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