Home Breaking News LK Advani: भारतीय राजनीति में हिंदुत्व-राष्ट्रवाद को दिलाई नई पहचान, भारत रत्न देकर पितृऋण से मुक्त हुई भाजपा

LK Advani: भारतीय राजनीति में हिंदुत्व-राष्ट्रवाद को दिलाई नई पहचान, भारत रत्न देकर पितृऋण से मुक्त हुई भाजपा

0
LK Advani: भारतीय राजनीति में हिंदुत्व-राष्ट्रवाद को दिलाई नई पहचान, भारत रत्न देकर पितृऋण से मुक्त हुई भाजपा

[ad_1]

Bharat Ratna Lal Krishna Advani gave new identity to Hindutva and nationalism in Indian politics BJP

लालकृष्ण आडवाणी
– फोटो : ANI

विस्तार


मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी और दूसरे कार्यकाल में लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न देने के साथ ही भाजपा पितृऋण से मुक्त हो गई। आडवाणी ने राममंदिर के लिए सोमनाथ से अयोध्या तक की रथयात्रा कर पूरे देश को झकझोर दिया था। उनकी इस रथयात्रा का ही कमाल था कि भारतीय राजनीति में न सिर्फ हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दे की स्थायी पैठ बनी, बल्कि पांच सदियों से राजनीतिक हाशिये पर खड़ा राम मंदिर का मुद्दा राजनीति के केंद्र में आ गया था। आडवाणी ही थे, जिन्होंने भाजपा के लिए अरुण जेटली, सुषमा स्वराज से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे उत्कृष्ट नेताओं की एक फौज खड़ी की। गुजरात दंगे के बाद जब तत्कालीन सीएम मोदी की कुर्सी खतरे में थी, तब आडवाणी ने ही उन्हें संकट से निकाला।

अछूत से सर्वग्राही…और फिर अपराजेय

स्थापना के बाद से ही भाजपा दूसरे दलों के लिए अछूत रही। खासतौर से कांग्रेस से लोहा लेने के लिए जनता पार्टी में जनसंघ के विलय के बाद नए स्वरूप में सामने आई भाजपा से सभी दल दूरी बनाने लगे थे। उस दौर में आडवाणी ने पहले भाजपा को अछूत से सर्वग्राही बनाया। अब वही भाजपा अपराजेय मानी जा रही है।

भाजपा की पहचान और सबसे चर्चित जोड़ी

आडवाणी और वाजपेयी की जोड़ी न सिर्फ पांच दशकों तक भाजपा की मुख्य पहचान रही, बल्कि इसे भारतीय राजनीति की सबसे सशक्त और चर्चित जोड़ी माना गया। दशकों तक वाजपेयी भाजपा का उदारवादी तो आडवाणी कट्टर हिंदूवादी और राष्ट्रवादी चेहरा माने गए।

2 से 86, फिर सत्ता और अब बहुमत

भाजपा की स्थापना के चार साल बाद इंदिरा गांधी की हत्या के बाद आम चुनाव में पार्टी को महज दो सीटें मिली थीं। अगले चुनाव में राम मंदिर मुद्दे पर आडवाणी की रथयात्रा ने पार्टी की सीटें 86 पर पहुंचा दीं। भाजपा की अगुवाई में राजग को 1996 में पहले 13 दिन, फिर 1998 में 13 माह, फिर 1999 में पहली बार कार्यकाल पूरा करने वाले पहले विपक्षी गठबंधन सरकार का रुतबा हासिल हुआ।

विस्थापित हिंदू से राजनीतिक किंवदंती बनने का सफर

8 नवंबर, 1927 को पाकिस्तान के कराची में जन्मे आडवाणी का परिवार बंटवारे के बाद मुंबई आ गया। हालांकि, वह पाकिस्तान में रहते ही संघ से जुड़ गए थे। यहां आने के बाद उन्होंने लंबे समय तक संघ के प्रचारक, पत्रकार के रूप में भी काम किया। रथयात्रा के बाद वह हिंदुत्व की राजनीति की किवदंती बन गए।

जिन्ना की तारीफ के बाद सियासी ढलान

आडवाणी के राजनीतिक कॅरिअर में ढलान 2005 में उस समय आया जब पाकिस्तान यात्रा में उन्होंने जिन्ना की तारीफ की। हालांकि इसके बाद भाजपा उनके चेहरे पर 2009 में चुनाव लड़ी, लेकिन हार गई।






[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here