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Russia-Ukraine war: 24 फरवरी, 2022 को रूस ने यूक्रेन पर पूरी ताकत से हमला किया. माना जा रहा था कि चंद दिनों यूक्रेन घुटने टेक देगा. रूसी सेना ने शुरुआत में महत्वपूर्ण बढ़त भी बनाई लेकिन अमेरिकी मदद से पुतिन का सपना पूरा न हो सका. यूक्रेन के राष्ट्रपति बीते करीब दो सालों से दुनियाभर में घूम-घूम कर पैसे और हथियारों का इंतजाम करते रहे तो उनके वफादार सैन्य कमांडरों ने रूस को छकाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. यूक्रेन सेना प्रमुख जनरल वेलेरी जेलुज्नी (Valerii Zaluzhnyi) ने पिछले साल की गलतियों से सबक लेते हुए जो रणनीति अपनाई वो सुपर पावर रूस के मुखिया पुतिन को भारी पड़ रही है.
युद्ध के पिछले हफ्ते यूक्रेनी सेना के प्रमुख ने चौंकाते हुए अपने ड्रोन से रूस की मिसाइल कार्वेट, रूसी हवाई क्षेत्र और दुश्मन के एक ऑयल रिफाइनरी पर हमला किया. इस हमले से रूस को काफी नुकसान हुआ है.
गोरिल्ला युद्ध पर जोर
यूक्रेन सेना के चीफ वेलेरी अब आमने सामने की लड़ाई के बजाए, रूस को गहरी चोट देने का काम कर रहे हैं. पुतिन के सीक्रेट एजेंट चाहकर भी कीव में बैठे किसी बड़े सैन्य अफसर या राष्ट्रपति जेलेंस्की का बाल बांका नहीं कर पाए हैं. उसके पीछे वेलेरी का चतुर दिमाग है. वेलेरी ने अपनी सेना के प्रमुख लोगों की सुरक्षा के लिए जो चक्रव्यूह रचा है, उसे रूस अभी तक भेद नहीं पाया है.
न जेट से, न टैंकों से, न मिसाइलों से, दिल बहलता है मेरा ड्रोन के आ जाने से…
रूस से युद्द में हुए नुकसान का पूरा कैलकुलेशन और उससे मिले सबक यूक्रेन की सेना के प्रमुख वेलेरी को जुबानी याद हैं. उन्हें वॉर जोन के सभी ब्लैक स्पॉट पता हैं. ऐसे में अपने संख्याबल का ध्यान रखते हुए यूक्रेनी कमांडर ने अब टैंक, फाइटर जेट या भारी भरकम महंगी मिसाइल के बजाए ड्रोन हमलों पर फोकस करते हुए रूस की नाक में दम कर दिया है.
दरअसल सारा खेल अब साइकॉलजी का है. जिसे यूक्रेन सेना के चीफ ने अपने दिलोदिमाग में बैठा लिया है. जियो पॉलिटिक्स और रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि पुतिन चाहे भले ये बात स्वीकार न करें लेकिन, दो साल तक खिंच गए इस युद्ध का दबाव यूक्रेन की तुलना में रूस पर ज्यादा है.
वो अपने एक-एक सैनिक का हिसाब किताब खुद देख रहे हैं. यानी वो अपने हर सैनिक की फिटनेस और उसकी सुविधाओं का ध्यान रख रहे हैं. अमूनन ये सब काम कोई कंपनी कमांडर या प्लाटून कमांडर करता है, लेकिन जब खुद देश के राष्ट्रपति और सेना प्रमुख किसी सैनिक की परेशानी में सीधे फोन करके उसका हौसला बढ़ाएं और मिलने चले आएं तो उससे जो पॉजिटिविटी आती है, बस रूस उसे ही नहीं ब्रेक कर पा रहा है.
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