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Missile Mail: दुनिया में पहली बार हुआ ऐसा, जब मिसाइल से दागी गईं चिट्ठियां

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Missile Mail: दुनिया में पहली बार हुआ ऐसा, जब मिसाइल से दागी गईं चिट्ठियां

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America Letter Missile: तब कम समय में जल्दी चिट्ठियां पहुंचाने को लेकर प्रयोग हो रहे थे. घोड़े, कुत्ते, ट्रक, ट्रेन या प्लेन नहीं एक कदम आगे जाकर अमेरिका ने मिसाइल दाग दी. जी हां, पढ़कर शायद आपको लगेगा कि यह झूठ बात होगी या हमला हुआ होगा पर सच्चाई बिल्कुल हैरान करने वाली है. भारत की आजादी के करीब 12 साल बाद 8 जून 1959 को पहली बार चिट्ठियों को मिसाइल से भेजा गया था. अमेरिकी पोस्ट ऑफिस डिपार्टमेंट ने इसके लिए रेगुलस I न्यूक्लियर मिसाइल का इस्तेमाल किया था. 

वारहेड में भरी थी चिट्ठियां

इस ट्रायल के लिए न्यूक्लियर वारहेड को बम से नहीं बल्कि लाल और नीले रंग के दो मेटल कंटेनर से भरा गया था जिसमें 1500-1500 लिफाफे थे. शीत युद्ध के दौर में पोस्ट मास्टर जनरल आर्थर समरफील्ड ने अमेरिका के रक्षा मंत्री के सामने मिसाइल-मेल का प्रस्ताव रखा था. आज हम इसे अजीबोगरीब और अतार्किक प्रयोग भले कहें लेकिन उस समय अमेरिकी रक्षा मंत्रालय इसके लिए तैयार हो गया. 

डाक विभाग ने तर्क दिया था कि अगर यह तरीका कामयाब होता है तो पोस्टल सिस्टम में क्रांति आ जाएगी. उधर, अमेरिका की सेना के लिए यह रूस को संकेत देने की कोशिश लगी कि उनका देश इतना सक्षम है कि मिसाइल फ्लाइट भी भेज सकता है. समरफील्ड ने उस दिन प्रयोग के बाद जारी की जाने वाली प्रेस रिलीज पहले से तैयार कर ली थी लेकिन सफलता मिलने तक उसे जारी नहीं किया. 

पनडुब्बी पर पहुंचाया गया लेटर

USS बारबेरो (SSG-317) सबमरीन नॉरफ्लॉक (वर्जीनिया) तट पर थी. इस पनडुब्बी के क्रू तक 3,000 लिफाफे पहुंचाए गए. उसे दोनों मेटल कंटेनरों में भरा गया. इसके बाद पनडुब्बी तट से दूर गई और 8 जून 1959 की दोपहर से ठीक पहले मिसाइल-मेल दाग दी गई. मिसाइल छोड़े जाने के बाद प्लेन से उसके रूट की निगरानी की गई. 22 मिनट के बाद यह मिसाइल मेपोर्ट (फ्लोरिडा) के नेवल स्टेशन पर आकर गिरी. समरफील्ड भी वहां पहुंच गए और मिसाइल से कुछ लेटर निकालकर लोगों को सबूत के तौर पर दिखाया. 

सभी लेटर एकजैसे थे. समरफील्ड ने इसे राष्ट्रपति आइजनहावर, उपराष्ट्रपति, कैबिनेट के सदस्यों, कांग्रेस के सदस्यों, सुप्रीम कोर्ट के जजों, अमेरिका के गवर्नरों आदि के लिए भेजा था. 

इस प्रयोग को भले ही सफल उपलब्धि के रूप में घोषित किया गया लेकिन कई सवाल भी खड़े गए. इसे तार्किक तरीका नहीं माना गया। इसके समर्थकों का तर्क था कि कुछ घंटे में ही अमेरिका से ब्रिटेन, भारत या ऑस्ट्रेलिया तक गाइडेड मिसाइल के जरिए लेटर पहुंचाए जा सकते हैं. यह भी कहा गया कि यह टेस्ट युद्ध के हथियारों का शांतिपूर्ण इस्तेमाल करने का प्रयास है. हालांकि इन तर्कों के बावजूद मिसाइल मेल को ताकत का प्रदर्शन ज्यादा माना गया.

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