[ad_1]

संदेशखाली के दौरे के दौरान अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य
– फोटो : एक्स/@NCSC
विस्तार
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के प्रतिनिधिमंडल ने बंगाल के संदेशखाली की घटना पर अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दी है। अनुसूचित जाति आयोग के प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को संदेशखाली का दौरा किया था। शुक्रवार को आयोग ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंप दी। भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल भी आज संदेशखाली के पीड़ितों से मिलने गया हुआ है, लेकिन स्थानीय पुलिस उन्हें नहीं जाने दे रही है। इससे संदेशखाली में हंगामा जारी है।
आयोग ने की राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग
अरुण हलदर ने कहा ‘जब हम संदेशखाली पहुंचे तो शाहजहां शेख और उसके गैंग ने वहां डरावना माहौल बना दिया। लोग बोलने से डर रहे थे। लोगों का कहना था कि जब हम चले जाएंगे तो उसके गैंग के लोग उन पर फिर हमला कर देंगे। हम पुलिस स्टेशन भी गए, लेकिन पुलिसकर्मी हमें देखकर वहां से चले गए और हमसे बात भी नहीं की। हमने राष्ट्रपति मुर्मू को रिपोर्ट सौंप दी है। संविधान का अनुच्छेद 338 अनुसूचित जाति और जनजाति को सुरक्षा देता है, लेकिन इसका उल्लंघन हो रहा है और उसमें सरकार का भी समर्थन है। इसलिए वहां (पश्चिम बंगाल) राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है।’
संदेशखाली जाने वाले अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष अरुण हलदर ने कहा कि ‘जब हम संदेशखाली पहुंचे तो उन्होंने (टीएमसी सरकार) बहुत ड्रामा किया। पीड़ित महिलाएं बहुत कुछ कहना चाहती थीं, लेकिन माहौल ऐसा था कि वे ज्यादा कुछ नहीं कह पायीं…लेकिन हम समझ गए कि वे असल में क्या कहना चाहती हैं। पुलिस भी हमारी बात नहीं सुन रही थी और यह बेहद अपमानजनक था। पुलिस राजनीतिक पार्टी की शाखा की तरह काम कर रही थी।’
[ad_2]
Source link