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Old Pension
– फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht
विस्तार
देश में पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल की तैयारी हो रही है। हालांकि अभी तक नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) द्वारा गठित सात सदस्यीय कमेटी ने हड़ताल की तिथि की घोषणा नहीं की है। नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने 19 फरवरी को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा है। इससे पहले उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर पत्र लिखा था। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में बंधु ने कहा है कि देश के करोड़ों कर्मचारी, पुरानी पेंशन व्यवस्था से वंचित हैं। इसके चलते कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित एवं अंधकारमय हो गया है। अन्य कर्मियों के साथ ही देश का शिक्षक समुदाय भी अपने भविष्य को लेकर बहुत चिंतित है। पुरानी पेंशन का मामला, एक करोड़ शिक्षकों-कर्मचारियों के साथ-साथ एक परिवार के पांच सदस्य, यानी लगभग 5 करोड़ लोगों से सीधा जुड़ा हुआ है।
विजय कुमार बंधु ने कहा, नई पेंशन व्यवस्था ‘एनपीएस’ के दुष्परिणाम अब सामने आ रहे हैं। एनपीएस में किसी को 1200 रुपये, 1800 रुपये एवं 2500 रुपये बतौर पेंशन मिल रहे हैं। इतनी कम राशि में कर्मियों या उनके परिजनों का इलाज तक नहीं हो पा रहा। बाकी जिम्मेदारियों का निर्वहन कैसे होता है, ये अंदाजा लगाया जा सकता है। देश के विकास में जिन कर्मचारियों ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण 35 साल दिए हों, राष्ट्र का भविष्य संवारने में योगदान दिया हो, आज उनका स्वयं का भविष्य अंधकारमय है। नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने अपने पत्र में कहा, यह न्यायोचित नहीं है। कर्मचारी संगठनों के लगातार दबाव के बाद कई प्रदेश सरकारों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल कर दी है।
ऐसे में केंद्र व बाकी राज्यों की सरकारों को भी ओपीएस लागू करनी चाहिए। देश के लिए अपनी जान न्यौछावर करने वाले अर्धसैनिक बलों को भी पुरानी पेंशन व्यवस्था से वंचित कर दिया गया है। यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की आनबान शान का प्रतीक केंद्रीय अर्धसैनिक बल, जो अपना बलिदान देकर राष्ट्र की सुरक्षा करते हैं, उन्हें भी ओपीएस से वंचित कर दिया गया है। बुढ़ापे में सामाजिक सुरक्षा से वंचित करना, अन्यायपूर्ण व कष्टदायक है।
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