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Congress-SP: I.N.D.I Alliance
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar
विस्तार
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और ममता बनर्जी अलग हो गए। बिहार में गठबंधन के अगुआ रहे नीतीश कुमार गठबंधन से अलग हो गए। पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की राहें अलग हो गईं। उत्तर प्रदेश में आरएलडी गठबंधन से अलग हो गई। अब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के अलग होने की चर्चा है। सियासी गलियारों में गठबंधन के इस बिखराव के मायने और कारण निकाले जा रहे हैं। लेकिन राजनीतिक जानकारों और कांग्रेस के ही कद्दावर नेताओं के मुताबिक गठबंधन में यह टूट कांग्रेस को बड़ा फायदा पहुंचाने वाली है। पार्टी में ही अंदरखाने कई नेता ऐसी टूट को कांग्रेस के लिए संजीवनी मान रहे हैं।
बीते कुछ समय से गठबंधन से टूट रहे सियासी दलों के रिश्तों का सियासी पैरामीटर पर आंकलन किया जा रहा है। राजनैतिक जानकारों का मानना है कि जो I.N.D.I गठबंधन पिछले साल जून में तैयार हुआ था। उसकी मंशा तो सही थी लेकिन गठबंधन एकदम विपरीत विचारधारा के लोगों से था। वरिष्ठ पत्रकार बृजेंद्र शुक्ला कहते हैं कि भाजपा से लड़ने के लिए ज्यादातर सभी दल एक साथ आ गए। लेकिन इन दलों में सबकी विचारधारा बिलकुल अलग-अलग थी। ऐसे में कयास उसी वक्त लगाए जाने लगे थे कि यह सब दल क्या एक साथ चल पाएंगे? वह कहते हैं कि हुआ भी वैसा ही। अमूमन प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस से अलग होने लगे। पहले ममता बनर्जी गईं, फिर नीतीश कुमार चले गए। आम आदमी पार्टी ने भी सियासी मैदान में अलग चलने का एलान कर दिया। अब अखिलेश यादव के अलग होने की बात कही जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषक प्रभात कुमार कहते हैं कि सियासी कसौटी पर अब यह परखना जारी है कि गठबंधन में टूट से किसको फायदा हो रहा है। प्रभात कहते हैं कि कांग्रेस से अलग होकर सभी दल खुद को मजबूत मान रहे हैं। क्योंकि ज्यादातर क्षेत्रीय दलों को यह लगता है कि राज्यों में उनकी स्थिति कांग्रेस से ज्यादा मजबूत है। ऐसे में गठबंधन के साथ जाकर कांग्रेस को सीट की शेयरिंग में उनका नुकसान था। यही हाल पंजाब में आम आदमी पार्टी के लिए कहा जा रहा है। दिल्ली में भी सीटों पर बात बनी तो अलग-अलग चुनाव लड़ने के रास्ते बन सकते हैं। तृणमूल कांग्रेस के नेता और पूर्व विधायक इलियास मोहम्मद कहते हैं कि गठबंधन के साथ जाने को लेकर उनके दल में कई लोग पहले से विरोध में थे। टीएमसी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अब जब पश्चिम बंगाल में उनकी पार्टी अलग चुनाव लड़ रही है, तो ज्यादा मजबूती के साथ मैदान में उतरेगी।
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