Home Breaking News Wildlife: भारत सहित पांच देश इंटरपोल के जरिये रोकेंगे वन्यजीव तस्करी, आर्थिक स्रोतों पर वार करना है लक्ष्य

Wildlife: भारत सहित पांच देश इंटरपोल के जरिये रोकेंगे वन्यजीव तस्करी, आर्थिक स्रोतों पर वार करना है लक्ष्य

0
Wildlife: भारत सहित पांच देश इंटरपोल के जरिये रोकेंगे वन्यजीव तस्करी, आर्थिक स्रोतों पर वार करना है लक्ष्य

[ad_1]

Wildlife five countries including India stop wildlife trafficking through Interpol

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : dailymail

विस्तार


वन्यजीव तस्करी रोकने के लिए भारत सहित पांच देश इंटरपोल चैनलों का उपयोग करेंगे। इनमें बाकी चार देश बांग्लादेश, थाईलैंड, मलयेशिया और इंडोनेशिया हैं। यह मिलकर तस्करों के सरगनाओं पर कार्रवाई करेंगे, एक-दूसरे से खुफिया जानकारियां भी साझा करेंगे। कार्रवाई का लक्ष्य तस्करों के वित्त स्रोत खत्म करना होगा।

हाल में सीबीआई और इंटरपोल ने विदेशी वन्य जीवों की तस्करी पर विशेषज्ञों की रीजनल इन्वेस्टिगेटिव एंड एनालिटिकल केस मीटिंग (आरआईएमसीएम) नाम से दो दिनी बैठक करवाई। इसमें सीबीआई के निदेशक प्रवीण सूद ने बताया कि विदेशी वन्यजीवों की तस्करी इनके अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा है। उन्हें बचाने के लिए मिले-जुले कदम उठाने की जरूरत है। वहीं बैठक में तय किया गया कि आने वाले समय में पांचों देश तस्करों से जब्त किए जा रहे वन्य जीवों के बारे में जानकारियां आपस में साझा करेंगे, अपराधों से जुड़ी सूचनाएं भी देंगे। इससे तस्करों, बिचौलियों और सरगनाओं तक पहुंचने व उन्हें पकड़ कर सजा दिलाने में मदद मिलेगी। 

2022 में भारत ने 50 बार की कार्रवाई

वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, रेवेन्यू इंटेलिजेंस सहित सीबीआई ने बताया कि भारत ने साल 2022 में कार्रवाई कर 50 बार विदेशी वन्य जीवों को तस्करों से अपने कब्जे में लिया। इनमें हुलॉक गिबन, विदेशी कछुए, बड़ी छिपकलियां, बीवर, मूर मकैक, बौने नेवले, पिग्मी मार्मोसेट बंदर, डस्की लीफी मंकी और बॉल पाइथन शामिल हैं। भारत को हवाईअड्डों पर सख्त जांच व निगरानी ने तस्करी पर रोक लगाने में मदद की है।

एग्जॉटिक वन्यजीव यानी विदेशी

विदेशी यानी एग्जॉटिक वन्य जीवों की तस्करी बैठक के केंद्र में थी। इसमें ऐसे जीव आते हैं जो किसी देश में स्थानीय जंगल में नहीं मिलते। उन्हें विदेशों से पकड़ कर लाया जाता है।

सामने आए तस्करी के रास्ते

बैठक में सामने आया कि वन्यजीवों की तस्करी के लिए वायु मार्ग प्रमुख माध्यम बन रहा है। जीवों को अफ्रीकी देशों से दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में लाया जा रहा है। वहां से इन्हें चीन व भारत में भेजा जा रहा है। विशेषज्ञों ने 4 प्रमुख रास्तों का उल्लेख किया जिनसे तस्करी हो रही है। इसे ऐसे अंजाम दिया जा रहा है –

  • तस्कर अफ्रीका से दक्षिण पूर्व एशिया और वहां से बांग्लादेश का रास्ता अपना रहे हैं। वन्य जीवों को वायु मार्ग से  भेजा जा रहा है, कार्गो को ‘मिस-डिक्लेयर’ यानी गलत श्रेणी में दर्ज कराया जा रहा है।
  • मलयेशिया और इंडोनेशिया पहुंचाए गए वन्यजीवों की म्यांमार व थाईलैंड के जरिये चीन में जमीनी सीमा से तस्करी हो रही है। इन जीवों में सांप, कछुए, इग्वाना शामिल हैं।
  • मलयेशिया से ही यह जीव थाईलैंड और फिर वायु मार्ग से भारत भेजे जा रहे हैं। थाईलैंड से भारत में म्यांमार के जरिये जमीनी सीमा से यह जीव भी लाए जा रहे हैं।

पालतू न बनाएं विदेशी वन्य जीव

विशेषज्ञों ने सावधान किया कि विदेशी वन्य जीवों को पालतू न बनाएं। इनसे जूनोटिक यानी जानवरों से इंसान को होने वाली बीमारियों का खतरा होता है। विदेशी वन्य जीवों का स्थानीय पर्यावरण में घुसपैठ कर दूसरे जीवों को खत्म करने का खतरा भी बना रहता है। कई देशों में इसी वजह से स्थानीय वन्यजीव खत्म हो चुके हैं।




[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here