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'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- धरातल, जिसका अर्थ है- धरती, पृथ्वी, वह तल जिसमें लंबाई-चौड़ाई हो, मोटाई आदि न हो, पृष्ठ, तल। प्रस्तुत है ज्ञान प्रकाश आकुल की कविता- तुम अभी कुछ देर ठहरो
मैं धरातल पर घड़ी भर पाँव धरना चाहता हूँ,
कल्पनाओं !
तुम अभी कुछ देर ठहरो ।
मैं बहुत ही थक गया हूँ
दूर से मुझको अकेले लौटकर आना पड़ा है,
मैं जिधर से जा चुका था
क्या बताऊँ क्यों मुझे फिर से उधर आना पड़ा है।
कुछ समय तक मैं स्वयं से बात करना चाहता हूँ,
व्यस्तताओं !
तुम अभी कुछ देर ठहरो ।
मैं जिन्हें अपना चुका था
आज मैं यह जान पाया वे नहीं मेरे हुए हैं
जो दबे थे खो चुके थे
वे अभाषित प्रश्न मुझको आज तक घेरे हुए हैं।
रिक्तियों को मैं किसी भी भाँति भरना चाहता हूँ
वर्जनाओं !
तुम अभी कुछ देर ठहरो ।
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11 घंटे पहले
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