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संजीव बालियान, सीएम योगी, जयंत चौधरी
– फोटो : Amar Ujala
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लोकसभा चुनाव को लेकर वेस्ट यूपी में जिस तरह से गठबंधन की राजनीतिक बिसात बिछी है। उससे किसी एक पार्टी की नहीं, बल्कि भाजपा व रालोद दोनों की राह आसान रहेगी। जिससे वेस्ट यूपी के अधिकतर जिलों में जाटों का बिखराव मुश्किल होगा। दोनों के लिए अन्य को जोड़ने पर जोर रहेगा तो सपा, कांग्रेस, बसपा के कोर वोटर में सेंधमारी के लिए जोर आजमाइश की जाएगी।
वेस्ट यूपी की बागपत, कैराना, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, गाजियाबाद, बिजनौर, नोएडा, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, पीलीभीत, बरेली, आंवला, बदायुं, मथुरा, फतेहपुर सीकरी, फिरोजाबाद, आगरा, अलीगढ़, हाथरस सीटों पर जाट वोटर हैं।
इनमें अधिकतर सीटों की यह स्थिति है कि वहां जाट वोटर चुनाव प्रभावित कर सकता है और जाटों को सबसे ज्यादा रालोद के साथ माना जाता है। लेकिन पिछले दो बार से लोकसभा व विधानसभा चुनावों में काफी सीटों पर जाटों में बिखराव भी देखने को मिला और उससे चुनाव नतीजे भी बदले। मगर अब रालोद व भाजपा के गठबंधन से यह बिखराव होना मुश्किल माना जा रहा है जो दोनों पार्टियों के लिए फायदेमंद रहेगा।
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