Home World World Weather: अल नीनो से सावधान! 2024 में पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ेगी गर्मी, पढ़ लीजिए वैज्ञानिकों की चेतावनी

World Weather: अल नीनो से सावधान! 2024 में पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ेगी गर्मी, पढ़ लीजिए वैज्ञानिकों की चेतावनी

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World Weather: अल नीनो से सावधान! 2024 में पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ेगी गर्मी, पढ़ लीजिए वैज्ञानिकों की चेतावनी

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World Weather Report: 2024 में दुनिया के एक बड़े हिस्से में भीषण गर्मी पड़ने के आसार हैं. आगामी एल नीनो की वजह से ग्लोबल वार्मिंग तेज होने का अनुमान है, जिससे 2024 में अमेज़ॅन से अलास्का तक रिकॉर्ड तोड़ तापमान देखने को मिलेगा. एक नए विश्लेषण में यह बात सामने आई है.

वैज्ञानिकों का यह भी अनुमान है कि बंगाल की खाड़ी, दक्षिण चीन सागर, भारत, फिलीपींस और कैरिबियन के पास के तटीय क्षेत्रों में जून तक असाधारण गर्मी का अनुभव होगा, उसके बाद अल नीनो का प्रभाव कम होने की संभावना है.

गौरतलब है कि पश्चिमी प्रशांत महासागर से गर्मी निकलने की विशेषता वाले अल नीनो ने ऐतिहासिक रूप से वैश्विक सतह के तापमान को बढ़ा दिया. इसने 2023 को  सबसे गर्म वर्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

अल नीनो के वजह से 2023 के उत्तरार्ध के दौरान बढ़े हुए तापमान का उत्तरी अमेरिका, यूरोप, चीन, दक्षिण अमेरिका और मेडागास्कर में गंभीर प्रभाव पड़ा, जिससे मौजूदा जलवायु संकट का प्रभाव तेज हो गया.

कंप्यूटर मॉडल का प्रयोग
नए विश्लेषण में कंप्यूटर मॉडल का उपयोग किया गया है और 2024 की पहली छमाही के दौरान रीजनल हॉटस्पॉट की पहचान की गई है. यह इस अवधि के दौरान एक नया ग्लोबल तापमान रिकॉर्ड स्थापित करने की 90 फीसदी संभावना दर्शाता है.

चीनी मौसम विज्ञान अकादमी के डॉ. निंग जियांग ने अलास्का और अमेज़ॅन बेसिन जैसे क्षेत्रों में साल भर चलने वाली समुद्री गर्मी, जंगल की आग और अन्य प्रतिकूल परिणामों के बढ़ते जोखिम की संभावना जताई. उन्होंने कहाकि इस जलवायु संकट पर ध्यान देने की तुरंत जरुरत है.

और क्या कहता है अध्ययन?
अल नीनो और ला नीना के बीच पृथ्वी के प्राकृतिक चक्र को देखते हुए, यह अध्ययन जुलाई 2023 से जून 2024 तक क्षेत्रीय सतह के वायु तापमान पर अल नीनो के प्रभाव का मॉडल तैयार करता है.

अध्ययन के निष्कर्षों से पता चलता है कि अमेज़ॅन में 2024 में रिकॉर्ड तापमान का अनुभव होने की संभावना है. इसकी वजह से जंगल की आग का खतरा बढ़ जाएगा. इसके अलावा अलास्का को तटीय कटाव के साथ-साथ ग्लेशियरों और पर्माफ्रॉस्ट के संभावित पिघलने का भी सामना करना पड़ रहा है.

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