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नरेंद्र मोदी ने ‘चंदे के धंधे’ को छिपाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इलेक्टोरल बॉण्ड का सच जानना देशवासियों का हक़ है, तब SBI क्यों चाहता है कि चुनाव से पहले यह जानकारी सार्वजनिक न हो पाए?
एक क्लिक पर निकाली जा सकने वाली जानकारी के लिए 30 जून तक…— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) March 4, 2024
मामला गड़बड़ है
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल ने पोस्ट करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी ने चंदा कारोबार को छिपाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है। जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनावी बॉन्ड के बारे में सच जानने का अधिकार पूरे देश के लोगों का है तो फिर एसबीआई क्यों नहीं चाहता कि यह सच चुनाव से पहले सार्वजनिक हो। उनका दावा है कि एक क्लिक में जानकारी प्राप्त की जा सकती है तो किसलिए 30 जून तक का समय मांगा जा रहा है। एसबीआई की यह मांग दर्शाता है कि मामला गड़बड़ है। गांधी का आरोप है कि देश का हर स्वतंत्र संगठन भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए मोदानी परिवार का हिस्सा बन रहा है। यह पीएम मोदी के असली चेहरे को छिपाने की कोशिश है।
आप क्रोनोलॉजी समझिए: पहले चुनाव होंगे, फ़िर इलेक्टोरल बांड की जानकारी सामने आएगी। सत्ताधारी दल आख़िर पॉलीटिकल फंडिंग से प्राप्त अपने अथाह धन के स्रोत के खुलासे से इतना क्यों घबरा रहा है?
याद रहे कि राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे और चुनावी ट्रस्ट के जांच-पड़ताल से पता चला है कि… https://t.co/4v08WYSVif— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) March 4, 2024
यह न्याय का मजाक
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की। उन्होंने एक्स पर कहा कि आप क्रोनोलॉजी समझिए कि पहले चुनाव और फिर चुनावी बॉन्ड का खुलासा। भाजपा को अपने वित्त खजाने के स्रोत का खुलासा करने में इतनी घबराहट क्यों हो रही है? कांग्रेस के अलावा, सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने सोमवार को कहा कि एसबीआई का कदम आशंकाएं पैदा कर रहा है। यह न्याय का मजाक है। उन्होंने एक्स पर कहा कि यह डिजिटल युग है। एक क्लिक पर जारी जानकारी मिलती है। समय की मोहलत मांगना आशांकाएं पैदा करती हैं।
In this digital age, all this information is a mouse-click away. Seeking extension raises suspicious apprehensions. pic.twitter.com/2Wocsn6njV
— Sitaram Yechury (@SitaramYechury) March 4, 2024
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