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Pay Commission
– फोटो : Amar Ujala/ Sonu Kumar
विस्तार
देश में आठवें वेतन आयोग के गठन को लेकर कर्मियों की तरफ से केंद्र सरकार के पास कई तरह के सुझाव आ रहे हैं। अभी तक केंद्र सरकार ने आठवें वेतन आयोग का गठन करने की घोषणा नहीं की है। केंद्र सरकार यह भी कह चुकी है कि अभी ये प्रस्ताव उसके पास विचाराधीन नहीं है। दूसरी तरफ कर्मचारी संगठन, लगातार वेतन आयोग के गठन का दबाव डाल रहे हैं। सरकार को ज्ञापन दिए जा रहे हैं। आंदोलन की चेतावनी दी गई है। इन सबके बीच इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर एसोसिएशन ‘आईआरटीएसए’ ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पूर्व वेतन आयोगों द्वारा की गई सिफारिशों का हवाला देते हुए कुछ सुझाव दिए हैं। इनमें कहा गया है कि तीसरे, चौथे और पांचवें सेंट्रल पे कमीशन ‘सीपीसी’ ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तों की समय-समय पर समीक्षा करने के लिए स्थायी मशीनरी गठित करने की सिफारिश की है। केंद्र सरकार को सीपीसी गठित करने के लिए दस वर्ष का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे में अब केंद्र सरकार को बिना किसी देरी के आठवें वेतन आयोग का गठन करना चाहिए।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भेजा है पत्र
आईआरटीएसए ने पिछले दिनों यह पत्र, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भेजा है। इस पत्र में कहा गया है कि मौजूदा समय में केंद्रीय वेतन आयोगों का गठन दस साल के नियमित अंतराल पर किया जा रहा है। इसमें माध्यम से सरकारी कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाओं/लाभों सहित परिलब्धियों की संरचना को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों के संबंध में जांच, समीक्षा, विकास व बदलावों की सिफारिश की जा सकती है। इसे केंद्र सरकार के कर्मचारियों के संबंध में विभिन्न विभागों, एजेंसियों और सेवाओं की विशेष आवश्यकताओं के रूप में देखा जाता है। तीसरे, चौथे और पांचवें सीपीसी ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तों की समय-समय पर समीक्षा करने के लिए स्थायी मशीनरी गठित करने की सिफारिश की थी। 6वीं सीपीसी ने पहली जनवरी 2006 से अपनी सिफारिशें लागू करने के लिए कहा था। इसके लिए 5वें सीपीसी के कार्यान्वयन के बाद से दस वर्ष की अवधि निर्धारित की गई है।
लंबी अवधि की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं
आईआरटीएसए के अनुसार, सातवें वेतन आयोग ने कहा है कि सीपीसी के गठन के लिए दस साल की लंबी अवधि की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है। इस अवधि के पूरा होने से पहले भी वेतन आयोग के गठन पर समीक्षा की जा सकती है। 7वीं सीपीसी की सिफारिशों के अनुसार, गत दस वर्षों में सरकारी कामकाज, प्रदर्शन और भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार, सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि, विभिन्न कर संग्रह की मात्रा, सरकारी विभागों की भूमिका, मुद्रास्फीति पैटर्न, मुद्रास्फीति के कारण वास्तविक वेतन में कमी और सेवा की स्थिति, आदि में कई बदलाव हुए हैं। सार्वजनिक उपयोगिताओं में निजी क्षेत्रों की भूमिका और उन पर सरकार का विनियमन, प्रत्येक विभाग में कर्मचारियों की संख्या, राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत कवर किए गए कर्मचारियों की संख्या, गरीबी में उल्लेखनीय कमी, कर्मचारियों और आम जनता के उपभोग पैटर्न में बदलाव, आदि भी देखे गए हैं।
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