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संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद की बैठक
– फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा है कि वैश्विक समुदाय का अफगानिस्तान को लेकर जो समग्र उद्देश्य है, भारत की भी वही प्राथमिकताएं हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बुधवार को अफगानिस्तान के मुद्दे पर बैठक हुई, जिसमें भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि ‘युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में आतंकवाद से निपटने की जरूरत है क्योंकि इसका सीधा असर हम पर होता है।’
क्या बोलीं रुचिरा कंबोज
रुचिरा कंबोज ने कहा कि हमारा उद्देश्य अफगानिस्तान में शांति, सुरक्षा और स्थायित्व स्थापित करना है। वैश्विक समुदाय के अफगानिस्तान को लेकर उद्देश्य हैं, वही भारत की प्राथमिकताएं हैं। जिनमें आतंकवाद से निपटना, समावेशी सरकार का गठन, महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा, नशे के खिलाफ लड़ाई और मानवीय मदद देना शामिल है। 18-19 फरवरी को कतर की राजधानी दोहा में अफगानिस्तान के मुद्दे पर बैठक हुई। इस बैठक में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस, भारत, कनाडा, चीन, फ्रांस और जर्मनी, ईरान, पाकिस्तान, रूस, सऊदी अरब, तुर्किए और संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि शामिल हुए।
कतर में हुई बैठक में ये देश हुए शामिल
कतर में हुई बैठक में स्पेशल कॉर्डिनेटर एंबेसडर की रिपोर्ट पर चर्चा हुई, जिसमें संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष दूत की नियुक्ति और अफगानिस्तान में इंटरनेशनल कॉन्टैक्ट ग्रुप की स्थापना जैसी सिफारिशें की गईं थी। कंबोज ने कहा कि भारत ने इस बैठक में पूरी सक्रियता से हिस्सा लिया। बैठक के दौरान गुटेरस ने कहा कि वैश्विक समुदाय को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि अफगानिस्तान फिर से आतंकियों के लिए पनाहगाह न बन जाए। कंबोज ने कहा कि अगर अफगानिस्तान में इंटरनेशनल कॉन्टैक्ट ग्रुप बनता है और इसमें सभी हिस्सेदारों का योगदान रहेगा तो यह काफी प्रभावी साबित हो सकता है। दोहा में हुई बैठक में तालिबान के प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए। कंबोज ने सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि अफगानिस्तान में हालात बेहद खराब हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफगानिस्तान में मानवीय मदद जारी रखनी चाहिए। कंबोज ने कहा कि भारत ने अफगानिस्तान में तीन प्रमुख स्तंभों खाद्य सुरक्षा, मेडिकल सप्लाई और शिक्षा पर फोकस किया है। भारत ने 50 हजार टन गेहूं अफगानिस्तान भेजा है। अफगान छात्रों को छात्रवृत्ति दी गई है। एक हजार अफगान छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा दी गई है। साथ ही अस्पतालों को जीवन रक्षक दवाएं मुहैया कराई हैं और नशे के लिए खिलाफ लड़ाई लड़ी है।
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