Home Breaking News खबरों के खिलाड़ी: रायबरेली से किसे टिकट देगी कांग्रेस, अमेठी से राहुल गांधी के फिर चुनाव लड़ने के कितने आसार?

खबरों के खिलाड़ी: रायबरेली से किसे टिकट देगी कांग्रेस, अमेठी से राहुल गांधी के फिर चुनाव लड़ने के कितने आसार?

0
खबरों के खिलाड़ी: रायबरेली से किसे टिकट देगी कांग्रेस, अमेठी से राहुल गांधी के फिर चुनाव लड़ने के कितने आसार?

[ad_1]

congress strategy of Rae Bareli vidhan sabha seat what are chance of Rahul Gandhi contesting again from Amethi

खबरों के खिलाड़ी।
– फोटो : AMAR UJALA

विस्तार


लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की पहली सूची में अमेठी या रायबरेली का नाम नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या कांग्रेस दोनों सीटों पर चुनाव लड़ेगी? क्या अमेठी से एक बार फिर राहुल गांधी उम्मीदवार होंगे और रायबरेली से क्या इस बार प्रियंका गांधी के चुनाव लड़ने की संभावना है? इन्हीं सवालों पर इस बार ‘खबरों के खिलाड़ी’ में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, जयशंकर गुप्त और अवधेश कुमार मौजूद थे। 

अवधेश कुमार: कांग्रेस ने अपने सर्वे कराए हैं। 1989 से अब तक कांग्रेस का उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन देख लीजिए। एक बार कांग्रेस को वहां 22 सीटें मिली थीं। अब वह मौजूदा स्थिति से अवगत है। कांग्रेस अब राहुल गांधी को अमेठी भेजकर दूसरी बार वह सीट नहीं हारना चाहेगी। कांग्रेस चाहती है कि राहुल वायनाड से जीतें और संसद में रहें। दिक्कत यह है कि कांग्रेस आत्मावलोकन नहीं कर पाती। वह उत्तर प्रदेश में मजबूती से उतरेगी ही नहीं तो वहां उसका आधार ही खत्म हो जाएगा। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कांग्रेस के पास आत्मविश्वास का अभाव हो गया है। कांग्रेस को इस समय उत्तर प्रदेश में सोच-समझकर चुनाव लड़ना चाहिए। 

विनोद अग्निहोत्री: अभी कांग्रेस की उत्तर प्रदेश की पूरी सूची आना बाकी है इसलिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की उम्मीदवारी होगी या नहीं, यह देखने के लिए इंतजार करना चाहिए। कांग्रेस को जब जीतने की शत-प्रतिशत संभावना नजर आएगी, तभी रायबरेली से प्रियंका गांधी की उम्मीदवारी तय होगी। एक पक्ष यह भी है कि प्रियंका के अलावा कांग्रेस का कोई नेता रायबरेली से चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं है। जहां तक अमेठी की बात है, वहां कांग्रेस विचार कर रही है कि वहां जीतने की क्या संभावना है। अगर कांग्रेस अमेठी-रायबरेली को छोड़ देती है तो यह संदेश जाएगा कि कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश ही छोड़ दिया है। 2014 में अरविंद केजरीवाल वाराणसी से उम्मीदवार थे और चुनाव हार गए थे, लेकिन चर्चा में आ गए। आज आम आदमी पार्टी दिल्ली से सत्ता में है। अटलजी भी चुनाव हारे थे। कांग्रेस के पास उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए सुसंगत रणनीति नहीं है। 2009 में कांग्रेस के पास उत्तर प्रदेश में खुद को मजबूत करने का मौका था, लेकिन दिल्ली में बैठे नेताओं ने पैर पर कुल्हाड़ी नहीं, बल्कि कुल्हाड़ी पर पैर मार दिया। 1977 के बाद कांग्रेस तीन साल बाद सत्ता में वापस आ गई थी। मौजूदा दौर में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर है। 

रामकृपाल सिंह: अगर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी, तीनों ही उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ें और जीत जाएं, तब भी क्या बदल जाएगा? क्या कांग्रेस भाजपा को रोक पाने की स्थिति में रहेगी? कांग्रेस के साथ संकट यह है कि वह क्षेत्रीय पार्टी नहीं हो सकती। किसी भी राष्ट्रीय दल को आगे बढ़ना हो तो उसे मजबूती से यह संदेश देना होगा कि हम ही विकल्प हैं। कांग्रेस को जम्मू-कश्मीर, बंगाल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, बिहार, तमिलनाडु से किसने हटाया? भाजपा ने तो नहीं हटाया। क्षेत्रीय दलों ने कांग्रेस का सफाया किया? जिसने दर्द दिया, अब कांग्रेस उसी से दवा मांग रही है। 34 साल में कांग्रेस अगर उत्तर प्रदेश में नहीं जीत रही तो उसके लिए उसकी नीतियां जिम्मेदार हैं। 

जयशंकर गुप्त: कांग्रेस रायबरेली और अमेठी से जरूर लड़ेगी। आखिर भाजपा ने रायबरेली, सुल्तानपुर, पीलीभीत से अब तक किसी को टिकट क्यों नहीं दिया? भाजपा तो इंदिरा गांधी के दौर का अनुसरण करती है। प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट की व्यवस्था को खत्म कर दिया। नोटबंदी होती है तो कैबिनेट के मंत्रियों को ही नहीं पता होता। कल्याण सिंह, उमा भारती ने क्यों भाजपा छोड़ी दी थी।




[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here