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8 मार्च का दिन पंजाब के लोगों को कभी भूलता ही नहीं है। इसी मनहूस दिन उनके कोठा ढहाऊ कलाकार को सरेराह गोलियों से छलनी कर दिया गया था। कोठा ढहाऊ मतलब ऐसा कलाकार जिसे सुनने के लिए घर के छज्जों (कोठों) पर इतनी महिलाएं जुट जाएं कि सारे के सारे छज्जे ही नीचे आ गिरें। अमर सिंह चमकीला ऐसा ही तो कलाकार था। संगीत की दुनिया में उसे भारत का एल्विस प्रेस्ले कहते हैं। अपने समय में सबसे ज्यादा गाने बेचने का उसका रिकॉर्ड था। भरी महफिल में अमरजोत संग रंगत जमाता था और उसके संगीत का रंग ऐसा है कि आज भी हर साल की 8 मार्च को सूबे भर के कलाकार उसके गांव डुगरी में जुटते हैं, उसकी याद में अखाड़ा रचने को।
8 मार्च 1988 को महज 27 साल की उम्र में मार दिए गए गायक अमर सिंह चमकीला पर एक फिल्म बीते साल दिलजीत दोसांझ ने ‘जोड़ी’ नाम से बनाई। फिल्म कब आई, कब गई किसी को पता भी नहीं चला। दिलजीत दोसांझ से निर्देशक इम्तियाज अली तब मिले जब ‘जोड़ी’ बन चुकी थी। फिर दिलजीत ने चमकीला को लेकर इम्तियाज का नजरिया सुना। दोनों के सुर ऐसे मिले कि दिलजीत का सितारा भी चमक उठा। वह एक बार फिर से अमर सिंह चमकीला बने और इस बार उनके साथ आ जुड़े मौजूदा दौर के सबसे मशहूर संगीतकार ए आर रहमान। रहमान, दिलजीत, इरशाद कामिल और मोहित चौहान ने फिल्म ‘अमर सिंह चमकीला’ का जो संगीत बनाया है, उसे अभी से लोग इस साल का सबसे हिट म्यूजिक बता रहे हैं।
डुगरी में इम्तियाज ने अखाड़े में मौजूद लोगों से तो बातचीत की है, वह अमर सिंह चमकीला की पत्नी गुरमैल कौर, बेटी अमनदीप कौर और दामाद दिलराज सिंह से भी मिले। सबने इम्तियाज और फिल्म ‘अमर सिंह चमकीला’ की टीम का खूब खैरमकदम किया। इम्तियाज ने इस मौके पर अमर सिंह चमकीला के स्मारक पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी और उनकी याद में दीया भी जलाया। इस दौरान स्थानीय विधायक गुरदेव सिंह मान पूरे समय फिल्म की टीम के साथ रहे।
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