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बसपा सुप्रीमो मायावती
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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प्रदेश में भाजपा और रालोद के बीच गठबंधन से बदले राजनीतिक समीकरण के दृष्टिगत बहुजन समाज पार्टी ने भी रणनीति तैयार कर ली है। इन दोनों दलों के जातीय समीकरण की काट के लिए बसपा सोशल इंजीनियरिंग के बूते चुनावी मैदान में ताल ठोकने के मूड में है।
पार्टी के अलंबरदार भी हामी भर रहे हैं कि टिकट वितरण में सभी जाति और धर्म को साधने का प्रयास किया जाएगा। गौरतलब है कि बसपा ने साल 2007 के विधानसभा चुनाव में सोशल इंजीनियरिंग के जरिए अप्रत्याशित रूप से सत्ता हासिल कर ली थी।
सियासी गलियारे में चर्चा है कि बसपा के सोशल इंजीनियरिंग के सूत्र से अन्य सियासी पार्टियों का चुनावी गणित गड़बड़ा सकता है। चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले बसपा प्रत्याशियों के नामों की पहली सूची आने की उम्मीद है। उधर, बसपा की इंडिया गठबंधन से करीबी बढ़ने की भी चर्चाएं आम हैं।
सियासी दुनियादारों का अनुमान है कि चुनाव आचार संहिता लागू होते ही राजनीतिक हलके से चौंकाने वाली खबर आ सकती है। आंकड़ों के मुताबिक, बहुजन समाज पार्टी का वोट प्रतिशत लगातार गिर रहा है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, सपा, रालोद समेत कई दलों के गठबंधन में शामिल रहकर बसपा ने उप्र की मात्र 10 सीटों पर ही सफलता हासिल की थी।
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