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Dhar Bhojshala: धार की भोजशाला फिर चर्चा में, जानिए क्या है विवाद और क्यों कहा जाता है इसे दूसरी अयोध्या

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Dhar Bhojshala: धार की भोजशाला फिर चर्चा में, जानिए क्या है विवाद और क्यों कहा जाता है इसे दूसरी अयोध्या

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Bhojshala: Dhar's Bhojshala again in discussion, know what is the controversy

धार की भोजशाला लंबे समय से विवादों में रही है। अब ASI सर्वे की अनुमति दी गई है।
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


मध्य प्रदेश के धार जिले का विवादित सरस्वती मंदिर भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ का बड़ा आदेश आया है। कोर्ट ने यहां ASI के सर्वे को अनुमति दे दी है। बता दें कि भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर माना जाता है तो मुस्लिम इसे मस्जिद बताते हैं। इसका विवाद भी लंबे समय से चला आ रहा है। 

क्यों संवेदनशील है भोजशाला

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला लंबे समय से विवाद में रही है। करीब 800 साल पुरानी इस भोजशाला को लेकर हिंदू-मुस्लिम मतभेद हैं। हिंदुओं के अनुसार भोजशाला यानी सरस्वती का मंदिर है। जबकि मुस्लिम इसे पुरानी इबादतगाह बताते हैं। हिंदू संगठन के लोग बताते हैं कि धार की ऐतिहासिक भोजशाला उसके नाम से ही स्पष्ट है कि यह राजा भोज द्वारा स्थापित सरस्वती सदन है यहां कभी 1000 वर्ष पूर्व शिक्षा का एक बड़ा संस्थान हुआ करता था। बाद में यहां पर राजवंश काल में मुस्लिम समाज को नमाज के लिए अनुमति दी गई, क्योंकि यह इमारत अनुपयोगी पड़ी थी। पास में सूफी संत कमाल मौलाना की दरगाह है। ऐसे में लंबे समय से मुस्लिम समाज में नमाज अदा करने का कार्य करते रहे। परिणाम स्वरूप पर दावा करते हैं कि यह भोजशाला नहीं बल्कि कमाल मौलाना की दरगाह है।

जबकि हिंदू समाज यह दावा करता है कि यह दरगाह नहीं बल्कि राजा भोज के काल में स्थापित सरस्वती सदन भोजशाला है। इतिहास में भी इस बात के प्रमाण मिलते हैं कि यहां से अंग्रेज मां सरस्वती की प्रतिमा निकाल कर ले गए जो कि वर्तमान में लंदन के संग्रहालय में सुरक्षित भी है। विवाद की शुरुआत 1902 से बताई जाती है, जब धार के शिक्षा अधीक्षक काशीराम लेले ने मस्जिद के फर्श पर संस्कृत के श्लोक खुदे देखे थे और इसे भोजशाला बताया था। विवाद का दूसरा पड़ाव 1935 में आया, जब धार महाराज ने इमारत के बाहर तख्ती टंगवाई जिस पर भोजशाला और मस्जिद कमाल मौलाना लिखा था। आजादी के बाद ये मुद्दा सियासी गलियारों से भी गुजरा। मंदिर में जाने को लेकर हिंदुओं ने आंदोलन किया। जब-जब वसंत पंचमी और शुक्रवार साथ होते हैं, तब-तब तनाव बढ़ता है। विवादों के चलते ही इसे इलाके की अयोध्या भी कहा जाता है। 

 

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