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पहले दमदार अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ फिल्म ‘सीरियस मेन’ में और फिर उसके बाद बीते साल की नंबर वन हीरोइन आलिया भट्ट के साथ फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ में अपनी जबर्दस्त अभिनय क्षमता का प्रदर्शन कर चुकी अभिनेत्री इंदिरा तिवारी अपनी अगली फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ के सोमवार को रिलीज हुए गाने वंदे वीरम में बहुत ही मार्मिक चरित्र निभाते नजर आईं। इस गाने की मुंबई के मुकेश पटेल ऑडिटोरियम में हुई लॉन्चिंग के मौके पर इंदिरा ने फिल्म में अपने किरदार रत्ना कश्यप को लेकर पूछे गए ‘अमर उजाला’ के सवालों पर खुलकर जवाब दिए।
ये पूछे जाने पर कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, दिल्ली में बिताया समय उन्हें फिल्मों में अभिनय करने में कितनी मदद कर रहा है? इंदिरा तिवारी ने कहा, ‘राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में हमें अभिनय की प्रक्रिया को आत्मसात करना सिखाया जाता है। ये सिखाया जाता है कि किसी किरदार की रूह को कैसे अपने शरीर में उतारा जाए और फिर कैसे उसे दर्शकों के सामने जिया जाए। लेकिन, रंगमंच से मेरा नाता उससे पहले भी रहा है। मैं भोपाल के मंचों पर बचपन से अभिनय करती आई हूं और अभिनय अब मेरी जीवनशैली बन चुका है।’
इंदिरा तिवारी को फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ के निर्माता विपुल शाह और निर्देशक सुदीप्तो सेन ने फिल्म के गाने वंदे वीरम की लॉन्चिंग पर पहली बार मुंबई मीडिया के सामने सार्वजनिक रूप से पेश किया। संयोगवश इंदिरा की ये मुंबई में पहली प्रेस कांफ्रेंस भी रही। उनकी पहली फिल्म ‘सीरियस मेन’ कोरोना संक्रमण काल के दौरान रिलीज हुई और दूसरी फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ में सारी लाइमलाइट आलिया भट्ट पर ही रही। हालांकि, इंदिरा तिवारी का कहना है कि उन्हें लाइमलाइट में रहने से ज्यादा अपने किरदारों के जरिये लोगों के सामने आना अच्छा लगता है।
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इंदिरा तिवारी की परवरिश उनकी मां डॉली तिवारी ने अकेले अपने बूते की है। इंदिरा कहती हैं, ‘मेरी मां ने एकल अभिभावक के तौर पर हमारी जिस तरह परवरिश की है, उसने मुझे एक मजबूत इंसान बनाने में बहुत मदद की है। मैं बचपन से उन्हें हालात से लड़ते और उन पर जीत हासिल करते देखती रही हूं। वह ऐसी महिला हैं जो किसी भी बेटी के लिए आदर्श हो सकती हैं। उनकी जिंदगी की चुनौतियों से जूझने की क्षमताओं ने मुझे भी जीवन में बहुत मदद की है।’
और, फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ में एक मां का किरदार निभाने में क्या उन्हें अपनी मां के इस जीवट से भी मदद मिली? ये पूछे जाने पर इंदिरा बताती हैं, ‘फिल्म ‘बस्तर द नक्सल स्टोरी’ की कहानी देश की उन तमाम मांओं की भी कहानी है जिनसे उनके बेटे उनसे छीन लिए गए। हर मां की कोख में जब बच्चा होता है तो वह सोचती है कि मेरा बेटा बड़ा होकर क्या बनेगा, कैसे वह अपने देश की सेवा करेगा, लेकिन उन मांओं की सोचिए, जिनके बेटे छीन लिए गए। वे तो ये भी नहीं समझ पातीं कि उनका बेटा किन हालात में होगा? ऐसी हर मां के जीवट ने मुझे इस फिल्म में रत्ना कश्यप का मेरा किरदार करने में मदद की है।’
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