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Electoral Bonds: क्षेत्रीय सियासी दलों को ₹ 5221 करोड़; तृणमूल, वाईएसआर कांग्रेस, बीजद और DMK के नाम भी शामिल

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Electoral Bonds: क्षेत्रीय सियासी दलों को ₹ 5221 करोड़; तृणमूल, वाईएसआर कांग्रेस, बीजद और DMK के नाम भी शामिल

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इलेक्टोरल बॉऩ्ड से क्षेत्रीय दलों के खजाने में भी करोड़ों रुपये आए (सांकेतिक तस्वीर)
– फोटो : amar ujala graphics

विस्तार


सुप्रीम कोर्ट के सख्त फरमान के बाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और निर्वाचन आयोग (ECI) ने राजनीतिक दलों को मिले चंदे का विवरण सार्वजनिक किया। इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से मिले करोड़ों रुपये का चंदा अब तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं था। हालांकि, एक मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पारित सख्त आदेश के बाद एसबीआई ने बॉन्ड खरीदने वाले लोगों के नाम सार्वजनिक किए हैं। एसबीआई ने अपनी सूचना निर्वाचन आयोग को मुहैया कराई। इसके बाद आयोग ने 14 मार्च की रात लगभग आठ बजे 700 पन्नों से अधिक का डेटा अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया। इसमें एक दस्तावेज बताता है कि बॉन्ड किसने और कितने मूल्य का खरीदा। दूसरे डॉक्यूमेंट में बॉन्ड भुनाने वाली पार्टियों का विवरण दर्ज है।

सभी पार्टियों को मिलाकर भी भाजपा की तुलना में 839 करोड़ रुपये कम 

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को अप्रैल, 2019 से जनवरी, 2024 के बीच करोड़ों रुपये का चंदा मिला है। इसी अवधि में अकेले भाजपा को 6,060.51 करोड़ रुपये मिले। यानी देश के सभी क्षेत्रीय दलों को मिलाने के बाद भी भाजपा को 839 करोड़ रुपये अधिक चंदा मिला। भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) सरीखे राष्ट्रीय दलों को भी करोड़ों रुपये मिले। हालांकि, चौंकाने वाली बात रही कि बसपा, सीपीआई-एम और एनपीपी जैसी राष्ट्रीय पार्टियों को बॉन्ड के जरिए एक भी रुपये का दान / चंदा नहीं मिला।

बंगाल से तमिलनाडु तक चार राज्यों में सत्तारूढ़ पार्टियों को करोड़ों रुपये चंदा मिला

जिन क्षेत्रीय सियासी दलों को 5221 करोड़ रुपये मिले हैं, इनमें पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC), आंध्र प्रदेश की सत्ताधारी पार्टी- वाईएसआर कांग्रेस, दशकों से ओडिशा की सत्ता पर काबिज बीजू जनता दल (बीजद) और लगभग पांच साल पहले तमिलनाडु में सरकार बनाने वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नाम भी शामिल हैं। सबसे कम राशि हासिल करने वाली पार्टियों में महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस और गोवा फॉरवर्ड पार्टी का नाम शामिल है। इन दलों को चुनावी बॉन्ड के जरिए 1 करोड़ रुपये से कम मिले।

 

संगठन का नाम धनराशि (करोड़ में)
तृणमूल कांग्रेस (TMC) 1,609.53
भारत राष्ट्र समिति (BRS) 1,214.70
बीजू जनता दल (बीजेडी) 775.50
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) 639
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) 337
तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) 218.88
शिव सेना 159.38
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) 73.5
जनता दल सेकुलर (जेडीएस) 43.40
सिक्किम क्रांतिकारी पार्टी 36.5
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) 31
जन सेना पार्टी 21
समाजवादी पार्टी (एसपी) 14.05
जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) 14
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) 13.5
अकाली दल 7.2
अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) 6.05
सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट 5.5

गुरुवार को सार्वजनिक हुआ आंकड़ा 

गौरतलब है कि चुनाव आयोग की तरफ से जारी दो दस्तावेजों में 426 पन्ने में बॉन्ड को इनकैश कराने की डिटेल शेयर की गई, जबकि चुनावी बॉन्ड के खरीदारों का विवरण 337 पन्ने में जारी किया गया। विवरण के विश्लेषण से पता लगा कि बीते लगभग पांच साल में भाजपा ने 8633 बार बॉन्ड भुनाया। कांग्रेस पार्टी ने 3146 बार, जबकि भारत राष्ट्र समिति ने 1805 बॉन्ड भुनाए। सभी बॉन्ड अलग-अलग मूल्यों के हैं। राष्ट्रीय जनता दल 148 बार बॉन्ड भुनाने में सफल रही, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) ने 244 बार बॉन्ड भुनाए।




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