Home Breaking News खास मुलाकात: पूर्व सैन्य अफसर कलिता बोले- देश हमारा, पीएम हमारे, कहीं भी जाएं, चीन को मतलब; पढ़ें साक्षात्कार

खास मुलाकात: पूर्व सैन्य अफसर कलिता बोले- देश हमारा, पीएम हमारे, कहीं भी जाएं, चीन को मतलब; पढ़ें साक्षात्कार

0
खास मुलाकात: पूर्व सैन्य अफसर कलिता बोले- देश हमारा, पीएम हमारे, कहीं भी जाएं, चीन को मतलब; पढ़ें साक्षात्कार

[ad_1]

लेफ्टिनेंट जन. आरपी कलिता (रि.) ने चीन को तीखा जवाब दिया है। कलिता ने कहा, हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे देश में किसी भी राज्य और किसी भी क्षेत्र में जाने के लिए स्वतंत्र है। हमारे प्रधानमंत्री या हमारे देश के मंत्री कहां जाते हैं, क्यों जाते हैं और कब जाते हैं, इस पर चीन को सवाल उठाने का कोई अधिकार ही नहीं है। अब उसे अपना पुराना राग अलापना बंद करना चाहिए कि अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है। आज पूरे भारत-चीन सीमा पर भारतीय सेना का दबाव है। अरुणाचल प्रदेश भारता का अभिन्न हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। इसे चीन को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए। कुछ दिन पहले ही पूर्वी सेना प्रमुख पद से सेवानिवृत्त कलिता ने अमर उजााल से खास बातचीत में कहा, पूर्वोत्तर का पिछले दस वर्षों में अभूतपूर्व विकास हुआ है। सेला टनल गेम चैंजर होगा। उन्होंने कहा, मणिपुर की घटना दुखद है और अभी भी पूर्ण शांति नहीं आ पाई है। भारत-म्यांमार सीम पर एफएमआर का गलत इस्तेमाल हुआ है। कलिता ने कहा, अगर परेश बरुआ असम में शांति और विकास चाहते हैं, इससे अच्छा मौका और क्या मिल सकता है कि इस प्रक्रिया में शामिल हों।

हमारे इलाके में है हमारा कब्जा

कलिता ने कहा, सबको मालूम है कि जब कोई भी हमारे प्रधानमंत्री या हमारे उच्चस्तरीय मंत्री अरुणाचल प्रदेश की यात्रा पर आते हैं, हर बार चीन ने उसका विरोध किया है। उन्होंने कहा, देश हमारा, प्रधानमंत्री हमारे, कहीं भी जाएं, चीन को इस पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईटानगर से तवांग में सेला टनल का उद्घाटन करने के बाद चीन ने अरुणाचल पर अपना दावा पेश किया था। उन्होंने कहा, वास्तविक कारण है कि चीन पूरे अरुणाचल प्रदेश पर को अपना इलाका मान कर दावा करता है। जो कि सच नहीं है। सीमा क्योंकि डिमार्केशन नहीं है, इसलिए सीमा को लेकर दोनों की अपनी-अपनी धारण है। लेकिन उसके बावजूद जो हमारा इलाका है, वहां पर हमारा कब्जा है। उन्होंने कहा, मैं देश वासियों को आश्वासन देना चाहता हूं, भारतीय सेना अपनी सीमा की रक्षा करने में सक्षम है।

दस वर्षों में हुआ अभुतपूर्व विकास

कलिता ने कहा, मैं ये कहूंगा कि पिछले दस वर्षों में पूर्वोत्तर में अभुतपूर्व विकास के काम हुए हैं। साथ ही हमारे फोर्सेस की रिवेलेंसिंग भी किया गया। फोर्सेस को चीनी सीमा में बढ़ाया गया है। बीआरओ बेहतर काम कर रही है। खास तौर पर पिछले दस से बारह वर्षों सड़कों और पुलों का जाल बिछ गया है। सेला टनल जिसका पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्धाटन किया, वह एक गैम चेंजर है। वह एक मुश्किल वाला इलाका है। तवांग क्षेत्र सर्दियों में पूरी तरह से कट जाता था। अब टनल बनने से किसी भी मौसम में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं आएगी। हर प्रकार की मूवमेंट में आसानी होगी। साथ ही आम नागरिकों को भी बहुत फायदा होगा। बीआरओ ने हर इलाके में खास तौर पर सिक्किम या अरुणाचल प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूर्वी लद्दाख में भी काफी काम किया है। इस कारण अब एलएसी तक बनकर तैयार हैं।

2014 से पहले और 2014 के बाद कितना अंदर देखते हैं

कलिता ने कहा, पिछले दस वर्षों में पूर्वोत्तर का अभूतपूर्व विकास हुआ। खास तौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के साथ ही शांति और स्थिरता में काफी सुधार आया है। जब तक सुरक्षा का माहौल नहीं होगा, तब तक विकास की गति तेज नहीं हो सकती। जैसे-जैसे शांति की स्थापना हुई। आतंकवादी गुटों ने हथिायर डालना शुरू किया। इसके साथ ही विकास की गति भी तेज होने लगी। इस कारण पिछले दस वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी तेजी आई है। कलिता ने कहा, जब भारत विकसित भारत की ओर अग्रसर हो रहा है, अगर इसका फायदा नहीं उठाएंगे तो यह नुकसान हमारे लिए होगा। हमारे युवा इस मौके का फायदा उठाएं। भारतीय सेना एक बहुत अच्छा प्रोफेशन है। भारतीय सेना में जाकर देश सेवा करते हुए एक अलग तरह की मन को शांति मिलती है। एक जिम्मेदार नागरिक बनिए।

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम से होगा देश मजबूत

केंद्रीय वित्तमंत्री ने बजट में सत्र में वाईब्रेंट विलेज की घोषणा की थी। ताकि सीमावर्ती इलाकों से पयालय रुके। इस उद्देश्य से उनकी प्राथमिक उपचार, शिक्षा और उनको गांव में ही काम का इंतजाम करने का बीड़ा उठाया गया। उनको हर प्रकार की सुविधा दी गई ताकि वे अपने गांव में ही रह कर आसानी से जीवन यापन करें। अरुणाचल प्रदेश के किबिथु और काहो में सबसे पहले प्रोजेक्ट शुरू किया गया। बाकी जगह पर भी काम चल रहा है। इसमें राज्य सरकार, केंद्र सरकार और भारतीय सेना मिलकर एक साथ काम कर रही है। इससे सीमावर्ती गांवों के हमारे लोग सीमाओं पर ही रहेंगे। इसके कई तरह के फायदे होते हैं। इन क्षेत्रों में पर्यटन की काफी संभावना है, उसे भी विकसित किया जा रहा है।

आसानी से हथियार उपलब्ध होना

मणिपुर के पिछले वर्ष तीन मई से जो हालात बने हैं, वह बहुत ही दुखद है। शुरू से ही आर्म फोर्सेस, असम राइफल्स, सीएपीएफ और राज्य पुलिस बहुत मेहनत कर रही है। लेकिन हालात  अभी तक पूरी तरह से काबू में नहीं आए हैं। इसके पीछ मुख्य कारण है, वहां आसानी से हथियारों का मिलना। काफी सारे हथियार पुलिस स्टेशन से लूटे गए। म्यांमार सीमा से आसानी से हथियार आते हैं। आसानी से हथियारों की उपलब्धता के चलते हिंसा कम नहीं हो रही है। लोगों के पास जो हथियार हैं, उसे वापस कराया जाना सुनिश्चित करना होगा।

कुकी और मैतेई में अविश्वास को खत्म करना दूसरा, सबसे बड़ा मुद्दा है कि वहां की दो प्रमुख समुदायों कुकी और मैतेई में जो अविश्वास बना है, उसे किसी भी तरह से विश्वास में बदलना। तभी मतभेद दूर हो सकते हैं। बातचीत शुरू हो, आपस में जो अविश्वास है और जो भेदभाव की भावना आई है उसे दूर करने की जरूरत है। यह तभी होगा जब दोनों समुदाय के नेता आमने-सामने बैठकर बात करेंगे। मुझे लगता है कि कोई तीसरा फोर्स आकर उनको मदद नहीं कर सकता। कुकी विधायकों एक साथ बैठकर कर लोकतांत्रितक प्रक्रिया के हिसाब से आगे बढ़ना होगा। उन्हें मुख्यमंत्री के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्री के नेतृत्व में बातचीत को आगे बढ़ाना होगा। आपस में बातचीत करके जब तक लोकतांत्रिक ढंग से समाधान नहीं खोजेंगे, तब तक इसका नतीजा निकलना मुश्किल है।

एसओओ कैंपों के हथियारों का नहीं हुआ है उपयोग

कलिता ने कहा, जहां तक मणिपुर में कुकी आंतकवादियों के साथ 2008 में एसओओ पर हस्ताक्षर किए गए थे। उसके बाद से उनको कुछ कैंपस दिए गए थे, जहां पर वो रहते थे। सुरक्षा के लिए उनके पास हथियार भी होते हैं। उनके हथियार पुराने हो गए हैं। म्यांमार में जो अस्थिरता चल रही है, उसके कारण और भारत-म्यांमार सीमा से आसानी से हथियार मिल जाते हैं। गन स्मगलिंग के तहत म्यांमार से आसानी से हथियार आ जाते हैं। जहां तर मेरा मानना है कि एसओओ कैंप के हथियारों का इस्तेमाल अभी तक नहीं हुआ है। एसओओ के हथियारों की जब जांच की गई थी पूरे हथियार पाए गए थे। लेकिन उनके काडर्स कैंप में कम संख्या में रहते थे। कुछ लोग परिवारों के पास जाते थे। 40 से 50 प्रतिशत उपस्थिति हमेशा रहती थी।

एफएमआर का हुआ गलत इस्तेमाल

कलिता ने कहा, इसमें दो मामले है, एक है सीमा पर तारबंदी और दूसरा है मुफ्त आवाजाही व्यवस्था (एफएमआर)। एफएमआर जब बनाया गया था, वह उस समय की जरूरत थी। सीमा की दोनों ओर रिश्तेदार या सगे संबंधी रहते थे, इसलिए यह नियम बनाया गया था। इसके साथ ही यह भी समझना होगा कि भारत-म्यांमार सीमा बहुत ही दुर्गम है। पहाड़ी क्षेत्र हैं, घने जंगल हैं। लेकिन इसका इस्तेमाल गलत हुआ। हालांकि रिश्तेदारों से मिलने या सीमा पर व्यापार करने के लिए बनाया गया था। लेकिन उसकी आड़ में ज्यादातर हथियारों का स्मगलिंग और ड्रग ट्रेफिकिंग के कामों के लिए इसका इस्तेमाल किया गया। यह हमारे देश की हित में नहीं है। सीमा प्रबंधन की जो चुनौतियां हैं, वह बढता गया है। कलिता ने कहा, अगर तारबंदी होगी और एफएमआर पर थोड़ा रोक होगा या उन पर निगरानी की जाएगी, तो सीमा प्रबंधन में सहूलियत होगी। उससे आर्म्स स्मगलिंग या ड्रग तस्करी, जो कि हमारे देश को बहुत नुकसान पहुंचा रही है, उससे निजात मिलेगी।

परेशा बरुआ के पास सबसे अच्छा अवसर

आरपी कलिता ने कहा, पिछले कुछ वर्षों में असम की स्थिति में बहुत सुधार हुआ है। ज्यादातर जो हथियारबंद गुट थे, चाहे वह बोड़ो इलाके में हो, या दिमा हासाउ में हो, कार्बि आंगलोंग में हो, सबने हथियार डाल दिए और शांति समौझेत पर हस्ताक्षर किए। शांति समझौते के तहत जो काम होने हैं, उस पर काम शुरू हो चुका है। साथ ही उल्फा के (बातचीत वाले गुट) अरविंद राजखोवा और अनुप चेतिया के नेतृत्व वाले ग्रुप ने शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा, लेकिन अभी भी ऊपरी असम के कुछ हिस्सों में खास कर चार जिलों, और अरुणाचल प्रदेश और उत्तरी नगालैंड खास कर (मून जिला) सीमावर्ती इलाकों, क्योंकि वहां से म्यांमार जाने में सहूलियत रहती है। उन इलाकों में कुछ हिस्सों में कभी-कभी हिंसा हो रही है, जो कि परेश बरुआ उल्फा (स्व.) द्वारा किया गया है। उल्फा (स्व.) अपनी उपस्थिति को बनाए रखने के लिए इस तरह के काम कर रहे हैं। हालांकि काफी सुधार हुआ है। अगर हम आतंकवाद मुक्त कहना चाहेंगे, तो परेश बरुआ अगर सरकार के साथ बातचीत करें, तो उससे बहुत फायदा होगा। कलिता ने कहा, मैं समझता हूं कि कोई भी जिम्मेदार भारतीय नागरिक, असम का रहने वाला है, जो अखमिया है। वे चाहेंगे कि असम का विकास हो, बच्चे स्कूल जाएं, उच्च शिक्षा ग्रहण करें, अच्छी नौकरी करें, इंडस्ट्री आए और पूरे इलाके में शांति हो। अगर परेश बरुआ असम की शांति और विकास चाहते हैं, इससे अच्छा मौका और क्या मिल सकता है कि इस प्रक्रिया में शामिल हों।

पूर्वोत्तर आइए, यहां की प्रकृतिक सुंदरता को निहारिए

कलिता ने कहा, असम ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वोत्तर को प्रकृति ने बहुत सुंदरता दी है। प्रकृति का प्राकृतिक देन है। यहां पर पर्यटन का बहुत संभावनाएं हैं। सिक्किम हो, अरुणाचल प्रदेश हो या फिर असम में कुछ न कुछ सुंदरता आपको देखने को मिलेगी। माजुली का हत्रीय हो, नगालैंड के उत्सव के बारे में हो। टी पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। कलिता ने कहा, मैं सभी भारतीयों से और बाहर के लोगं से भी निवेदन करूंगा कि पूर्वोत्तर आएं और पूर्वोत्तर की सुंदरता का आनंद उठाएं।

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here