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Indian National Lok Dal
– फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा में भाजपा-जजपा गठबंधन टूटने से इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) को राजनीतिक संजीवनी मिलने की आस है। हरियाणा में साढ़े चार साल पहले जो जमीन पार्टी खो चुकी है, उसे दोबारा तलाशने निकली है। गठबंधन टूटने के दो दिन बाद ही इनेलो ने लोकसभा चुनाव को लेकर बड़ा फैसला लिया है।
कोई करिश्मा करने की संभावना बेशक न हो, लेकिन इनेलो ने प्रदेश की दसों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का खम ठोका है। खास बात यह है कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और ऐलनाबाद से विधायक अभय सिंह चौटाला एक बार फिर उसी कुरुक्षेत्र से अपना भाग्य आजमाएंगे जहां से इंडिया गठबंधन की ओर से आम आदमी पार्टी मैदान में उतरी है।
इससे पहले अभय चौटाला 2009 में और अर्जुन चौटाला 2019 में यहां से चुनाव लड़ चुके हैं। पार्टी सुप्रीमो और पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे, वह पार्टी के स्टार प्रचारक के तौर पर फील्ड में काम संभालेंगे। पिछले कुछ समय से वह कार्यकर्ताओं के बीच जा रहे हैं।
साढ़े चार साल पहले इनेलो से टूटकर जननायक जनता दल (जजपा) का गठन हुआ है। इसलिए पिछली बार इनेलो के कार्यकर्ता दो पार्टियों में बंट गए। मौजूदा स्थिति में जजपा के दस विधायक हैं और इनेलो के पास एक। अचानक भाजपा और जजपा का गठबंधन टूटने से इनेलो भी सक्रिय हो गई है। क्योंकि जजपा और इनेलो दोनों ही पार्टियों के कार्यकर्ता एक ही सोच के हैं।
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