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CRPF
– फोटो : Amar Ujala/ Himanshu Bhatt
विस्तार
सीआरपीएफ के ग्राउंड कमांडर यानी ‘सहायक कमांडेंट’ भले ही आतंकियों व नक्सलियों से निपटने, राष्ट्रीय आपदा, चुनाव और कानून व्यवस्था सुधारने में अव्वल रहते हों, मगर वे तरक्की के मोर्चे पर लगातार पिछड़ते जा रहे हैं। सहायक कमांडेंट को पहली पदोन्नति मिलने में ही करीब 15 साल लग रहे हैं। इससे बल में ग्राउंड कमांडरों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। कैडर अधिकारियों को ओजीएएस और एनएफएफयू की मूल भावना को लेकर संघर्ष करना पड़ रहा है। एनएफएफयू का फायदा, सभी कैडर अधिकारियों को नहीं मिल सका है। इन समस्याओं का हल खोजने के लिए सीआरपीएफ डीजी ने कैडर अधिकारियों का ‘बोर्ड ऑफ ऑफिसर’ गठित किया है। ‘बोर्ड ऑफ ऑफिसर’ द्वारा तीन माह में अपनी रिपोर्ट, बल मुख्यालय को सौंपी जाएगी।
सीआरपीएफ की 48वीं बटालियन के कमांडेंट वी. शिवा रामा कृष्णा की अध्यक्षता में 11 अधिकारियों का एक बोर्ड गठित किया गया है। यह बोर्ड, सीआरपीएफ मुख्यालय को कैडर अधिकारियों की पदोन्नति में आई स्थिरता को लेकर अपने सुझाव देगा। पदोन्नति में किन कारणों से देरी हो रही है, स्थिरता को कैसे दूर किया जाए और सरकार के नियमों के मुताबिक वित्तीय अपग्रेडेशन को किस तरह से बढ़ाया जाए, आदि बातों पर ‘बोर्ड ऑफ ऑफिसर’ एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा। बोर्ड के अन्य सदस्यों में अमित चौधरी, कमांडेंट सीआरपीएफ अकादमी, त्रिलोक नाथ सिंह टूआईसी 5वीं बटालियन, टूआईसी संजय गौतम 51वीं बटालियन, मनोरंजन कुमार टूआईसी 194वीं बटालियन, पंकज वर्मा डिप्टी कमांडेंट ट्रेनिंग ब्रांच ‘मुख्यालय’, विवेक कुमार डीसी रांची, पुश्कर सिंह डीसी आरटीसी अमेठी, अरूण कुमार राणा सहायक कमांडेंट 75वीं बटालियन, मितांशु चौधरी एसी 103 आरएएफ और विनोद कुमार एसी 139वीं बटालियन, शामिल हैं।
‘बोर्ड ऑफ ऑफिसर’ के कार्यक्षेत्र में जो बातें शामिल की गई हैं, उनमें कैडर अफसरों की तय समय पर पदोन्नति कैसे सुनिश्चित हो, शामिल है। क्या इसके लिए मौजूदा भर्ती नियमों में बदलाव की जरूरत है। अगर बदलाव जरूरी हैं, तो उसका ठोस तर्क देना होगा। सभी कैडर अधिकारियों तक एनएफएफयू और एनएफएसजी का फायदा कैसे पहुंचे, इस बाबत सुझाव देने होंगे। बल में अफसरों का प्राधिकार, इसे कैसे बढ़ाया जाए। ऐसे मामलों में मुकदमेबाजी को कम करने के लिए कौन से कदम उठाए जाएं। पदोन्नति में ठहराव, इस समस्या को किसी अन्य तरीके से हल किया जा सकता है, तो उसके बारे में भी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
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