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राहुल गांधी (फाइल)
– फोटो : अमर उजाला
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निर्वाचन आयोग 16 मार्च को लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर सकता है। इसके साथ ही आचार संहिता लग जाएगी और लोकसभा चुनावों की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। चुनावों की औपचारिक शुरुआत के पहले हुए कई सर्वे-ओपिनियन पोल में भाजपा को बढ़त मिलती दिखाई जा रही है तो कुछ में भाजपा को दो-तिहाई बहुमत पाता हुआ बताया जा रहा है। कम से कम एक बात पर सभी ओपिनियन पोल सहमत हैं कि इस बार की लड़ाई में भाजपा बढ़त की स्थिति में है।
हालांकि, कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष के हाथ से अभी बाजी निकली नहीं है। उसके पास अभी भी कई बड़े पत्ते हैं जिसे सही से खेलकर वह सत्ता पक्ष को मुश्किल में डाल सकती है। लेकिन यदि ओपिनियन पोल के अनुसार ही परिणाम आते हैें तो इससे विपक्ष के कई नेताओं पर बड़े सवाल खड़े हो सकते हैं। इनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी शामिल होंगे जिनकी भारत जोड़ो यात्रा ने सरकार की पेशानी पर बल डाल दिया था।
माना जाता है कि भारत जोड़ो यात्रा 1.0 के कारण ही कांग्रेस कर्नाटक और तेलंगाना में जीत हासिल कर सकी थी। लेकिन राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा 2.0 के बाद भी यदि भाजपा केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में सफल हो जाती है तो कांग्रेस के रणनीतिकारों को अपनी रणनीति पर दोबारा पुनर्विचार करने की जरूरत पड़ जाएगी।
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