[ad_1]
उज्जैन में कलयुग का एक ऐसा श्रवण कुमार भी है जिसने अपनी मां की चरण पादुका के लिए अपनी ही चमड़ी दे दी। सर्जरी के बाद लौटकर अपनी मां को अपने हाथों से ये चप्पल पहनाई।
[ad_2]
Source link
[ad_1]
उज्जैन में कलयुग का एक ऐसा श्रवण कुमार भी है जिसने अपनी मां की चरण पादुका के लिए अपनी ही चमड़ी दे दी। सर्जरी के बाद लौटकर अपनी मां को अपने हाथों से ये चप्पल पहनाई।
[ad_2]
Source link