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मोरबी पुल हादसा
– फोटो : Social Media
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ओरेवा समूह के प्रबंध निदेशक जयसुख पटेल को सख्त शर्तों पर रिहा करने का आदेश दिया। उन पर अक्टूबर 2022 में मोरबी पुल ढहने की घटना के संबंध में ट्रायल कोर्ट द्वारा फैसला किया जाना है। अक्टूबर 2022 में हुए हादसे में 135 लोग मारे गए थे। ओरेवा नामक कंपनी 2008 से पुल का प्रबंधन कर रही थी। कंपनी ने मरम्मत के बाद 2022 में दिवाली से पहले इसे नागरिकों के लिए खोल दिया था।
पटेल की भूमिका अधिक जांच के दायरे में आ गई क्योंकि उन्होंने पुल को फिर से खोलने की घोषणा करने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी। लेकिन पुल को खोलने से पहले मरम्मत कार्य सही तरीके से किया गया है किया नहीं इस संबंध में कोई प्रमााण पत्र नहीं लिया गया।
पटेल 14 महीने से जेल में हैं। पटेल को जमानत देते हुए न्यायमूर्ति अभय ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने पीड़ित के रिश्तेदारों की इस दलील पर विचार किया कि वह एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं और इस मामले में पीड़ित के रिश्तेदारों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील उत्कर्ष दवे को पुलिस सुरक्षा की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया, “यह राज्य का कर्तव्य है कि वह मुकदमे के समापन तक वकील को दिए गए संरक्षण को जारी रखे। संबंधित पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी उक्त अधिवक्ता के खतरे की आवधिक समीक्षा करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह निडर होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में सक्षम रहें, क्योंकि वे पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
इसके अलावा, हाईकोर्ट ने आत्मसमर्पण करने से पहले पटेल की गायब रहने पर भी विचार किया। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि पटेल को एक सप्ताह के भीतर मोरबी अदालत के समक्ष पेश किया जाना चाहिए और ट्रायल कोर्ट को इस मुद्दे पर सरकारी वकील को सुनने के बाद “कड़े नियम और शर्तों पर” मुकदमे के लंबित रहने तक उन्हें जमानत पर रिहा करना किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हम यह स्पष्ट करते हैं कि इस फैसले में की गई टिप्पणियों के बावजूद, संबंधित अदालत इस आदेश में की गई प्रथम दृष्टया टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना आवेदन पर फैसला करने के लिए स्वतंत्र है।”
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