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प्रहलाद गुंजल और ओम बिरला
– फोटो : अमर उजाला
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कोटा लोकसभा सीट पर बेहद रोचक मुकाबला देखने को मिलने वाला है। ओम बिरला के सामने मैदान में कभी उनके धुर विरोधी रहे प्रहलाद गुंजल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। यह सिर्फ बिरला और गुंजल के बीच चुनाव नहीं है बल्कि हाड़ौती की सियासत में इसके पीछे भी कई बड़े चेहरे इसमें शामिल हैं।
हालांकि 2023 में हुए राजस्थान के विधानसभा चुनाव में गुंजल का टिकट बीजेपी ने होल्ड पर रख लिया था। इसके बाद वसुंधरा राजे के कहने पर गुंजल देर रात कोटा में ही ओम बिरला के ऑफिस पहुंचे। इसके बाद बीजेपी ने कोटा उत्तर से गुंजल को विधानसभा प्रत्याशी घोषित कर दिया। उनका मुकाबला कांग्रेस के शांति धारीवाल से हुआ, जिसमें गुंजल हार गए। गुंजल 2003 में कांग्रेस के कद्दावर नेता पूर्व मंत्री रामकिशन वर्मा को चुनाव में मात देकर रामगंजमंडी से पहली बार विधानसभा पहुंचे थे।
बीजेपी से बनते-बिगड़ते रिश्ते
गुर्जर आरक्षण के दौरान गुंजल ने बीजेपी की तत्कालीन सीएम वसुंधरा राजे के खिलाफ हो गए थे। इसके बाद उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया, फिर 2008 में निर्दलीय लड़ कर हार गए। इसके बाद 2009 में राजे, गुंजल के घर पहुंची और करीब 2 साल बाद फिर बीजेपी में लौटे। 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले 2022 में राजे के जन्मदिन पर केशोरायपाटन से उनकी देव दर्शन यात्रा की शुरुआत हुई, जहां गुंजल ने मोर्चा संभाला हुआ था। वहीं 2023 के विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद वसुंधरा राजे को सीएम बनाए जाने का बयान देने वाले विधायकों में गुंजल सबसे ज्यादा मुखर रहे।
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