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हृदय रोगों के जोखिम को कैसे कम किया जाए, समय पर इसकी पहचान कैसे की जाए इसके लिए वैज्ञानिकों की टीम लगातार शोध कर रही है। इस दिशा में ब्रिटिश शोधकर्ताओं को बड़ी कामयाबी मिली है। वैज्ञानिकों ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उपकरण विकसित किया है, दावा किया जा रहा है कि इसकी मदद से किसी व्यक्ति में वेंट्रीकुलर एरिथमिया (वीए) का आसानी से पता लगाया जा सकता है।
वेंट्रीकुलर एरिथमिया, हृदय गति से संबंधित गंभीर समस्या मानी जाती है जो निचले कक्षों (वेंट्रिकल्स) से उत्पन्न होती है। इसका समय पर निदान-उपचार न हो पाए तो इसके जानलेवा दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
वेंट्रीकुलर एरिथमिया में दिल के तेजी से धड़कने और तेजी से रक्तचाप कम-ज्यादा होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं, जिसका अगर तुरंत इलाज न किया जाए तो इसके कारण कई लोगों में चेतना की हानि और अचानक मृत्यु का भी खतरा हो सकता है।
इसको रोकने और समय रहते समस्या के निदान और उपचार के लिए वैज्ञानिकों ने VA-ResNet-50 नामक AI टूल विकसित किया है। इसकी मदद से हृदय गति की समस्या का समय पर निदान करने और अगर कोई दिक्कत है तो उसका उपचार करने में मदद मिल सकती है। वेंट्रीकुलर एरिथमिया की स्थिति हार्ट फेलियर जैसी दिक्कतों का भी कारण बन सकती है।
यूरोपियन हार्ट जर्नल में इसके प्रकाशित शोधपत्र के अनुसार वैज्ञानिकों ने 270 वयस्कों के ईसीजी की जांच करके उनमें हृदय की स्थितियों के बारे में पता लगाने की कोशिश की। लगभग 159 लोगों ने घातक वेंट्रिकुलर अतालता का अनुभव किया था। एआई टूल का उपयोग हृदय ताल की जांच करने के लिए किया गया था ताकि प्रतिभागियों में ये पता लगाया जा सके कि कहीं इससे भविष्य में गंभीर समस्याओं का खतरा तो नहीं है?
वैज्ञानिकों ने कहा ये टूल सटीक तरीके से समस्या के निदान में सहायक हो सकता है। हर पांच में से चार मामलों में, एआई उपकरण ने सही भविष्यवाणी की, इससे ये पता लगाना भी आसान हो सकता है कि किस मरीज में वेंट्रीकुलर एरिथमिया और इसके कारण गंभीर जोखिमों का खतरा हो सकता है?
यूनिवर्सिटी में इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी के प्रोफेसर आंद्रे एनजी कहते हैं, महत्वपूर्ण बात यह है कि इस उपकरण से ये जान सकते हैं कि किस व्यक्ति में जोखिम अधिक है। हम न सिर्फ इससे हृदय गति में समस्या के बारे में पता कर सकते हैं साथ ही इससे यह पता करने में भी मदद मिलती है कि किसे इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफाइब्रिलेटर के साथ जीवन रक्षक उपचार की जरूरत हो सकती है। समय रहते इन समस्याओं का निदान और उपचार से हृदय रोगों से मृत्यु के खतरे को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
शोधकर्ता कहते हैं, मरीजों के इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम की जांच में एआई का उपयोग करते हुए हम उनमें हृदय रोग की गंभीर समस्याओं के जोखिम को निर्धारित कर सकते हैं। उचित उपचार प्राप्त होने से रोगी का जीवन बचाना आसान हो सकता है। हृदय स्वास्थ्य के संबंध में ये आवश्यक हो जाता है कि समय पर रोगी की स्थिति का निदान और उपचार हो सके। ज्यादातर स्थितियों में अगर समय पर रोगी को उपचार मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है।
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स्रोत और संदर्भ
Artificial intelligence for ventricular arrhythmia capability using ambulatory electrocardiograms
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