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हिंद महासागर में चीनी युद्धपोत
– फोटो : PTI
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बांग्लादेश में इन दिनों ‘इंडिया आउट’ कैंपेन चर्चा में है। कहने के लिए तो इस कैंपेन के पीछे बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) का हाथ बताया जा रहा है। लेकिन असल में इस कैंपेन के पीछे चीन का शातिर दिमाग है, जो मालदीव में भी भारत के खिलाफ इस तरह की साजिश को अंजाम दे चुका है। चीन की नजर न केवल बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर है, बल्कि वह बांग्लादेश के बंदरगाहों का इस्तेमाल भी भारत के खिलाफ करना चाहता है।
बांग्लादेश में चल रहा भारत विरोधी ‘इंडिया आउट’ कैंपेन सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। इसमें भारतीय उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान किया जा रहा है। वहीं बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना पूर्ण तरीके से भारत के साथ खड़ी नजर आ रही हैं। लंबे समय तक इंडिया आउट कैंपेन पर चुप्पी साधने के बाद उन्होंने सोमवार को भारत के उत्पादों का बहिष्कार करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विपक्षी दल के नेता पहले अपनी पत्नियों की भारतीय साड़ियों को जलाएं। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा, “भारत से आने वाले गरम मसाले, प्याज, लहसुन, अदरक, जैसे उत्पाद भी बीएनपी नेताओं की रसोई में नहीं दिखने चाहिए।” शेख हसीना की ये टिप्पणी बीएनपी के वरिष्ठ नेता रुहुल कबीर रिजवी के सड़क पर अपना कश्मीरी शॉल जलाने और बांग्लादेश के लोगों से भारतीय उत्पादों के खिलाफ विरोध करने का आग्रह करने के बाद आई है।
कौन है बांग्लादेश में ‘इंडिया आउट’ अभियान के पीछे चेहरा?
2024 की शुरुआत में, शेख हसीना के नेतृत्व में अवामी लीग ने रिकॉर्ड सीटों के साथ आम चुनाव जीता और 5वीं बार उनकी प्रधानमंत्री पद पर ताजपोशी हुई। इस चुनाव में अवामी लीग 299 सीटों में से 216 सीटों के साथ विजयी हुई। जेएनयू के दक्षिण एशियाई अध्ययन केंद्र, स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के अध्यक्ष प्रोफेसर संजय भारद्वाज के मुताबिक बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) हाल ही में हुए चुनावों के परिणामों में मिली असफलता से सदमे में है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश में पहले तीन प्रमुख राजनीतिक दल होते थे, जिसमें अवामी लीग, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी प्रमुख थे। लेकिन बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट ने जमात-ए-इस्लामी का पंजीकरण रद्द करते हुए फैसला सुनाया कि पार्टी राष्ट्रीय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य बताया।
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