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'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अर्णव, जिसका अर्थ है- समुद्र, सूर्य। प्रस्तुत है रामनरेश त्रिपाठी की कविता- स्वदेश गौरव
(1)
अतुलनीय जिनके प्रताप का
साक्षी है प्रत्यक्ष दिवाकर
घूम-घूमकर देख चुका है
जिनकी निर्मल कीर्ति निशाकर
देख चुके है जिनका वैभव
ये नभ के अनंत तारागण
अगणित बार सुन चुका है नभ
जिनकी विजय-घोष रण-गर्जन।
(2)
शोभित है सर्वोच्च मुकुट से
जिनके दिव्य देश का मस्तक
गूँज रही हैं सकल दिशाएँ
जिनके जयगीतों से अब तक
जिनकी महिमा का है अविरल
साक्षी सत्य-रूप हिम गिरिवर
उतरा करते थे विमानदल
जिनके विस्तृत वक्षस्थल पर।
(3)
सागर निज छाती पर जिनके
अगणित अर्णव-पोत उठाकर
पहुँचाया करता था प्रमुदित
भूमंडल के सकल तटों पर
नदियाँ जिनकी यश-धारा-सी
बहती हैं अब भी निशि-वासर
ढूँढ़ों उनके चरण-चिह्न भी
पाओगे तुम इनके तट पर।
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5 घंटे पहले
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