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नई दिल्ली. तेज रफ्तार हो रही आम जिंदगी में टेक्नोलॉजी का दखल बढ़ता जा रहा है. खेल भी इससे अछूते नहीं हैं. खेलों में फैसलों को काफी हद तक फुलप्रूफ बनाने और इनमें किसी भी तरह की संशय की स्थिति को दूर करने के लिए टेक्नोलॉजी इन दिनों निर्णायकों (अंपायर्स/रैफरी) की आदर्श सहयोगी साबित हो रही है. इंडियन प्रीमियर लीग यानी IPL के 2024 सीजन में भी डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS) को और सटीक बनाया गया है.
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने बेहतर डिसीजन मेंकिंग के लिए टेक्नोलॉजी के दखल को बढ़ाते हुए नया कैमरा बेस्ड रिव्यू सिस्टम लांच किया है जिसे स्मार्ट रिप्ले सिस्टम यानी SRS का नाम दिया गया है. इसके लिए स्टेडियम पर अलग-अलग लोकेशंस पर नए हाई स्पीड कैमरों को लगाया गया है जो विभिन्न एंगल से विजुअल्स लेकर इन्हें जल्द फैसला लेने के लिए थर्ड अंपायर तक भेजते हैं. जल्द, अधिक सटीक और एरर प्रूफ फैसले लेने में स्मार्ट रिप्ले सिस्टम काफी मददगार साबित हो रहा है.
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हालांकि एक धड़ा ऐसा भी है जो खेलों या क्रिकेट में टेक्नोलॉजी के बहुत अधिक ‘प्रवेश’ के पक्ष में नहीं है. इसका मानना है कि खेल में टेक्नॉलॉजी का थोड़ा बहुत इस्तेमाल तो ठीक है लेकिन इस पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता ठीक नहीं है क्योंकि इससे काफी वक्त जाया होता है. साथ ही यह ह्यूमन ब्रेन के तुरतफुरत फैसले और किसी प्लेयर को ‘किस्मत’ (अंपायर के गलत निर्णय की स्थिति में) का साथ मिलने के अधिकार पर भी अतिक्रमण करता है. कुछ लोगों का तो यह भी कहना है कि बैट्समैन के ठीक सामने खड़ा अंपायर ही गेंद की ‘दिशा’ को सटीक जज कर पाने की स्थिति में होता है और टेक्नॉलाजी को भी पूरी तरह एरर प्रूफ नहीं माना जा सकता. वैसे क्रिकेट/आईपीएल में टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रभाव का एक पॉजिटिव पहलू यह भी है कि इससे दर्शकों को मैचों को बेहतर क्वालिटी का टेलीकास्ट देखने को मिल रहा है. साफ पिक्चर क्वालिटी और अलग-अलग एंगल से मैच के विजुअल्स उन्हें मैच का पूरा मजा दे रहे हैं. क्रिकेट को बैट्समैन गेम माना जाता है. स्मार्ट रिव्यू सिस्टम के इस्तेमाल के साथ ही IPL को रोचक बनाने के लिए इस सीजन में एक ओवर में दो बाउंसर का नियम भी लागू किया गया है.
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इस तरह काम करता है SRS
स्मार्ट रिप्ले सिस्टम यानी SRS के लिए मैदान में विभिन्न स्थानों पर आठ हाइस्पीड हॉकआई कैमरे लगाए गए हैं, इसके साथ ही दो हॉकआई कैमरा ऑपरेटर, टीवी अंपायर के साथ बैठकर उन्हें रियल टाइम इमेजेज और डेटा उपलब्ध कराते हैं ताकि कम समय में सटीक फैसला लेने में मदद मिले. इस नए सिस्टम के आने से टीवी ब्रॉडकास्टर का काम कम हुआ है जो कि पहले हॉक हाई ऑपरेटर और अंपायर के बीच की अहम कड़ी थे. नए सिस्टम से TV अंपायर विजुअल/डेटा का और बेहतर तरीके से विश्लेषण कर सकेंगे. स्मार्ट रिप्ले सिस्टम के तहत सटीक विजुअल स्क्रीन पर दिखेंगे, इसमें स्पलिट स्क्रीन का विकल्प भी रहेगा जिससे फैसला लेना पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है. यह प्रणाली TV अंपायर को पहले की तुलना में अधिक विजुअल्स के अनालिसिस का अवसर देती हैऔर हॉकआई ऑपरेटर्स के साथ उनकी बातचीत का सीधा प्रसारण भी करती है ताकि दर्शकों को स्पष्ट रूप से डिसीजन का औचित्य समझ में आ सके.

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इन फैसलों में विशेष रूप से मददगार
SRS वैसे तो जरूरत पड़ने तो हर तरह के डिसीजन में अंपायर की मदद करेगा लेकिन बाउंड्री रोप के बेहद नजदीक लिए गए कैच या फील्डिंग अटेम्पट, एलबीडब्ल्यू, स्टंपिंग और रनआउट के जटिल फैसलों में इसके विजुअल्स, टीवी अंपायर के लिए बेहद उपयोगी है. क्रिकेट में फैसलों को सटीक बनाने के लिए पहले से ही स्निकोमीटर, स्मार्ट बेल्स एंड स्टंप्स, स्पाइडर कैम, अंपायर्स कैमरा, हॉटस्पाट और स्पीडगन जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है. स्निकोमीटर और हॉटस्पॉट को एलबीडब्ल्यू और क्लोजइन बैट-पैड कैचों को जज करने में उपयोगी माना जाता है. यह बताता है कि गेंद ने बैटर के बल्ले को छुआ है या नहीं. इसी तरह स्मार्ट बेल्स/स्टंप्स में LED लाइट फिट होती हैं जो गेंद के टकराने पर जल उठती हैं. स्पाइडर कैम को केबल और तारों की मदद से एक जगह से दूसरी जगह मूव किया जा सकता है. क्रिकेट के मैदान पर 360 डिग्री एंगल से दिखाने के साथ यह स्पाइडर कैम छक्कों और दूसरे आसमानी शॉट्स का बेहतर व्यू देते हैं.
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कुछेक बार खतरा भी बन चुके स्पाइडर कैम
हालांकि तकनीक के अधिक प्रयोग के कुछ खतरे भी हैं. स्पाइडर कैम को मूव करते समय कुछेक बार इसके प्लेयर्स से टकराने की कुछ घटनाएं भी सामने आई हैं. दिसंबर 2022 में दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न टेस्ट के दौरान तेज गेंदबाज एनरिक नॉर्किया बड़े हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बचे थे. फील्डिंग करते समय दक्षिण अफ्रीका के नॉर्किया से एक स्पाइडर कैम टकरा गया और वो गिर गए थे. उनकी कोहनी में चोट आई थी. हादसे के बाद नॉर्किया ने कहा था कि इन कैमरों को सिर की ऊंचाई पर नहीं उड़ना चाहिए. जानकारी के अनुसार, करीब 25 किलो वजनी स्पाइडर कैम 35 KM/H की अधिकतम गति से मूव कर सकता है, ऐसे में मैदान में कुछ बार यह हादसे का कारण बना है. कुछ मौकों पर स्पाइडर कैम के केबल्स के कारण फील्डर को कैच लेने में भी परेशानी हुई है.
आईपीएल 2024 के दौरान ही 24 मार्च को राजस्थान रॉयल्स और लखनऊ सुपरजायंट्स के मैच के दौरान स्पाइडरकैम का केबल टूट गया था और कैमरा जमीन पर गिर गया था जिसके कारण खेल कुछ देर रोकना पड़ा था. इसी तरह 30 मार्च को पंजाब सुपरकिंग्स और लखनऊ सुपरजायंट्स के मैच के दौरान पंजाब के बैटर लियाम लिविंगस्टोन का तेजतर्रार आसमानी शॉट (जिसका छक्के के लिए बाउंड्री के बाहर जाना तय था) स्पाइइर कैम से टकरा गया था.
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Tags: BCCI, DRS, Indian premier league, IPL, IPL 2024
FIRST PUBLISHED : April 5, 2024, 08:04 IST
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