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Reservation: ‘मराठा समुदाय पिछड़ा नहीं है, आरक्षण की जरूरत नहीं; बॉम्बे हाईकोर्ट में किसने कही यह बात? जानें

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Reservation: ‘मराठा समुदाय पिछड़ा नहीं है, आरक्षण की जरूरत नहीं; बॉम्बे हाईकोर्ट में किसने कही यह बात? जानें

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Maratha community not backward doesn't need quota, says petitioner in Bombay HC

बॉम्बे हाईकोर्ट
– फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार


मराठा आरक्षण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू की गई। इस दौरान एक याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि मराठा समुदाय पिछड़ा नहीं है, इसलिए समुदाय के लोगों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण की जरूरत नहीं है। मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय, न्यायमूर्ति जी एस कुलकर्णी और न्यायमूर्ति फिरदोश पूनीवाला की पीठ ने सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) श्रेणी के तहत समुदाय को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। बता दें कि अलग अलग याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं ने सरकारी विभागों में नियुक्तियों और शैक्षणिक संस्थानों में कोटे के तहत दाखिले पर रोक लगाने की मांग की है।

याचिकाकर्ता के वकील ने दिया यह तर्क

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही फैसला कर चुका है। शंकरनारायण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा मई 2021 में मराठा समुदाय को दिए गए पहले आरक्षण को रद्द कर दिया गया है। 2021 के बाद से मराठा समुदाय के व्यक्तियों की योग्यता आरक्षण की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वकील ने आगे कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हर बार याचिकाकर्ताओं को अदालत आना पड़ता है क्योंकि सरकार एक विशेष समुदाय को खुश करना चाहती है जो कि बहुत शक्तिशाली है। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार बार-बार दावा करती रही है कि मराठा समुदाय पिछड़ा है, जबकि ऐसा नहीं है। शंकरनारायण ने आगे कहा कि मराठा समुदाय के लोग समाज की मुख्यधारा में रहे हैं और वे एक अगड़ा समुदाय हैं, इसलिए उन्हें आरक्षण देने की आवश्यकता नहीं है।

‘आरक्षण पर विचार करने की जरूरत नहीं’

वरिष्ठ वकील ने आगे दावा किया कि सरकार ने एसईबीसी श्रेणी के तहत नया आरक्षण देने के लिए जिन आंकड़ों पर भरोसा किया, वे 2021 के समान ही थे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बीते 36 महीनों में कुछ कोई भी कारण नजर नहीं आया, जिसके लिए आरक्षण पर फिर से विचार करने की जरूरत पड़ी हो। 

बता दें कि राज्य सरकार ने 2022 में एसईबीसी श्रेणी के तहत मराठा समुदाय को आरक्षण दिया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने समुदाय को दिए गए पहले के आरक्षण को रद्द कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इसके कारण महाराष्ट्र में समग्र आरक्षण की सीमा का उल्लंघन हुआ।

महाराष्ट्र में पिछले साल सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे के नेतृत्व में मराठा आरक्षण के लिए एक नया आंदोलन शुरू हुआ था।




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