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UP Lok Sabha Election 2024: अफजाल अंसारी को पटखनी देने के लिए मैदान में कैसे आए भाजपा के पारस नाथ राय, जानें

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UP Lok Sabha Election 2024: अफजाल अंसारी को पटखनी देने के लिए मैदान में कैसे आए भाजपा के पारस नाथ राय, जानें

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How BJP's Paras Nath Rai came into the fray to defeat Afzal Ansari, know the details

गाजीपुर में कांटे की लड़ाई
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


भाजपा ने उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित गाजीपुर सीट से पारस नाथ राय को उतारा है। भाजपा ने अफजाल अंसारी को पटखनी देने के लिए पारस नाथ राय को टिकट देकर गाजीपुर, घोसी, बलिया, आजमगढ़ और बनारस के भूमिहारों को साधा है। इसे भगवा पार्टी के एक तीर से कई निशाने साधने वाले तुरुप के इक्के के तौर पर देखा जा रहा है। पारस नाथ राय संघ के पुराने कार्यकर्ता हैं। वहीं वह जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के सभी चुनावों में चुनावी प्रबंधक की भूमिका निभाते रहे हैं। पारस के मैदान में उतरते ही गाजीपुर में लड़ाई कांटे की हो गई है।

मनोज सिन्हा ने मांगी थी उपराज्यपाल पद से छुट्टी

हालांकि, गाजीपुर की लोकसभा सीट पर पहला दावा जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा का बनता है। वह इस क्षेत्र से तीन बार सांसद चुने गए हैं। पिछले साल से इस सीट पर उनके पुत्र अनुभव सिन्हा का नाम प्रमुखता से चल रहा था। मनोज सिन्हा खुद गाजीपुर और बनारस से बराबर लगाव और आना जाना रखते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तीन साल पूरे होने के बाद जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल पद से छुट्टी मांगी थी। तब सिन्हा के मन में गाजीपुर से 2024 के लिए तैयारी करने का विचार था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें जम्मू-कश्मीर में इतिहास बनाने की जिम्मेदारी संभालते रहने की सलाह दी थी। प्रधानमंत्री नहीं चाहते थे कि मनोज सिन्हा इस महत्वपूर्ण दायित्व को छोड़ें।

काफी समय से चल रही थी गाजीपुर सीट पर तैयारी

भाजपा के बनारस और गाजीपुर के सूत्र बताते हैं कि गाजीपुर सीट से 2019 में अफजाल अंसारी चुनाव जीत गए थे। जबकि साल 2014 से 2019 तक के कार्यकाल में मनोज सिन्हा का नाम गाजीपुर में विकास पुरुष के रूप में लिया जाने लगा था। वह 13वीं लोकसभा के बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले सांसदों में रहे हैं। राष्ट्रीय मीडिया में भी 2014 की उनकी हार चर्चा का विषय बन गई थी। कहा जाता है कि गाजीपुर सीट की हार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी हैरान किया था। लिहाजा 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा ने तरीके से मोहरे बिछाए थे। सुभासपा के ओम प्रकाश राजभर, भाजपा छोड़ कर गए दारा सिंह चौहान की भी एनडीए और भाजपा में घर वापसी सुनिश्चित की गई। दोनों नेताओं को भाजपा ने मान भी दिया। तब से इसके प्रबल कयास थे कि जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल पद से इस्तीफा देकर मनोज सिन्हा गाजीपुर ले चुनाव लड़ सकते हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री दया शंकर मिश्र दयालू को इस सीट से मनोज सिन्हा के पुत्र अनुभव सिन्हा के चुनाव लड़ने की उम्मीद थी। अनुभव सिन्हा पेशे से इंजीनियर रहे हैं। बहुराष्ट्रीय टेलीकाम कंपनी में काम कर चुके अनुभव सिन्हा लंबे समय से गाजीपुर की जनता के संपर्क में थे। वह सामाजिक समारोह, शादी, व्याह, लोगों के दु:ख-सुख में काफी समय दे रहे थे। अनुभव की इस सक्रियता को उनके 2024 में लोकसभा चुनाव में उतरने के तौर पर देखा जा रहा था।

गाजीपुर से भाजपा ने क्यों किया भूमिहार का चयन?

पूर्वांचल की राजनीति में भूमिहार ब्राह्मण काफी अहमियत रखते हैं। बलिया, घोषी, गाजीपुर, आजमगढ़, बनारस, जौनपुर में भूमिहारों की अच्छी खासी तादाद है। इसलिए भाजपा के लिए भूमिहारों को साधना बेहद जरूरी था। बलिया से इस बार भाजपा ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर को प्रत्याशी बनाया है। नीरज शेखर को यह टिकट वीरेंद्र सिंह मस्त की जगह दिया। बनारस से खुद प्रधानमंत्री उम्मीदवार हैं। ऐसे में रणनीतिक रूप से गाजीपुर में भूमिहार को टिकट देना आवश्यक था। सूत्र बताते हैं कि पार्टी के आंतरिक सर्वे में दो नाम प्रमुखता से आए थे। इसमें पहला नाम मनोज सिन्हा और दूसरा मोहम्मदाबाद से पूर्व विधायक अलका राय का रहा। अलका राय 2022 का विधायनसभा चुनाव हार गई थीं। इसलिए भाजपा के पास अधिक विकल्प नहीं थे। माना जा रहा है कि इस दौरान संघ ने अपने पुराने कार्यकर्ता, साफ सुथरी छवि के और पूर्व प्रधानाचार्य पारस नाथ राय का नाम प्रस्तावित किया। पारस नाथ राय मनोज सिन्हा के हर चुनाव में प्रबंधन की कमान संभालते आए हैं। लिहाजा उनके नाम पर मुहर लगने में कोई दिक्कत भी नहीं आई।

एक तीर से भाजपा ने साधे कई निशाने

गाजीपुर में अंसारी परिवार बनाम भूमिहार ब्राह्मण खूब चलता है। भाजपा के मोहम्मदाबाद सीट से 2002 में विधायक बने कृष्णानंद राय की हत्या के बाद गाजीपुर में भूमिहार बनाम अंसारी ने नया कलेवर ले लिया था। कृष्णानंद राय की हत्या बाहुबली मुख्तार अंसारी के गुर्गों ने ही की थी। बीएचयू के छात्र संघ अध्यक्ष और 1996, 1999 और 2014 में लोकसभा के लिए निर्वाचित मनोज सिन्हा से भी अफजाल अंसारी परिवार को काफी दिक्कतें रहती हैं। दरअसल मनोज सिन्हा को स्व. कृष्णानंद राय के परिवार के हितैषी के रूप में जाना जाता है। गाजीपुर के अलावा घोसी कभी कांग्रेस के नेता कल्पनाथ राय का गढ़ माना जाता था। बनारस से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। वह पिंडरा से विधायक रह चुके हैं। इस तरह से भाजपा ने पारस नाथ राय को टिकट देकर न केवल गाजीपुर बल्कि बलिया, घोसी, आजमगढ़, बनारस और जौनपुर में भूमिहारों को भी अपने पक्ष में साध लिया है।




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