Home Breaking News CGHS: क्या 42 लाख केंद्रीय कर्मियों को लगेगा झटका? क्या सीजीएचएस छीन लेगा केंद्र, क्यों जताई जा रही यह आशंका?

CGHS: क्या 42 लाख केंद्रीय कर्मियों को लगेगा झटका? क्या सीजीएचएस छीन लेगा केंद्र, क्यों जताई जा रही यह आशंका?

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CGHS: क्या 42 लाख केंद्रीय कर्मियों को लगेगा झटका? क्या सीजीएचएस छीन लेगा केंद्र, क्यों जताई जा रही यह आशंका?

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CGHS: Will 42 lakh central government employees be shocked? Will Centre take away CGHS? Know all details

सीजीएचएस
– फोटो : amarujala.com

विस्तार


स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की तरफ से 28 मार्च को जारी कार्यालय ज्ञापन, केंद्रीय कर्मचारियों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। वजह, उस ज्ञापन में कहा गया था कि सीजीएचएस आईडी कार्ड को भारत सरकार के आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते (एबीएचए) से जोड़ा जाएगा। इस कार्ड को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट से 30 दिन के भीतर लिंक करना होगा। इसके बाद कर्मियों को ऐसी आशंका होने लगी कि देर-सवेर सरकार, सीजीएचएस को लेकर कोई बड़ा निर्णय ले सकती है। जो कर्मचारियों और पेंशनरों को सीजीएचएस से दूर कर सकती है।

सरकारी कर्मियों के लिए प्राइवेट अस्पतालों में इलाज की सुविधा खत्म हो सकती है। स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) की स्टेंडिंग कमेटी के सदस्य और अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव सी. श्रीकुमार ने पिछले सप्ताह इस बाबत ‘स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय’ के सचिव को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि कर्मचारी संगठनों और जेसीएम ने केंद्र सरकार के इस निर्णय का समर्थन नहीं किया है।

कर्मियों से सलाह लेना भी जरूरी नहीं समझा

श्रीकुमार ने अपने पत्र में लिखा है कि स्वास्थ्य मंत्रालय का यह निर्णय कि अब सीजीएचएस आईडी कार्ड को भारत सरकार के आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते (एबीएचए) से जोड़ना होगा, हैरान करने वाला है। इस निर्णय से केंद्र सरकार के कर्मचारी सकते में आ गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐसा निर्णय लेने से पहले केंद्रीय कर्मचारी संगठनों और स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) की स्टेंडिंग कमेटी की सलाह लेना भी जरूरी नहीं समझा। हालांकि इस बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक अधिकारी ने कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधि को सूचित किया है कि सीजीएचएस आईडी कार्ड को भारत सरकार के आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते (एबीएचए) से जोड़ना यह अनिवार्य नहीं है। यह निर्णय एक विकल्प के तौर पर रहेगा।

इस फैसले के पीछे कोई तर्क नजर नहीं आता

श्रीकुमार ने अपने पत्र में कर्मचारियों और पेंशनरों की शंकाओं से सरकार को अवगत कराया है। कर्मियों और पेंशनरों का मानना है कि उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय के इस निर्णय के पीछे कोई तर्क नजर नहीं आता। वजह, आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (एबीएचए) तो सामान्य नागरिकों के लिए है, जबकि सीजीएचएस के दायरे में सरकारी कर्मचारी और पेंशनर आते हैं। आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता, बीमा योजना के अंतर्गत काम करता है। इसमें योग्य नागरिकों को पांच लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है। इसका प्रीमियम सरकार द्वारा भरा जाता है। सीजीएचएस में सरकारी कर्मचारी, एक तय राशि जमा करता है। इसके तहत कर्मियों को महंगे प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज की सुविधा मिलती है। यहां पर इलाज का खर्च, पांच लाख रुपये तक सीमित नहीं रहता। एबीएचए में सरकार प्रीमियम भरती है, तो सीजीएचएस में रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी द्वारा एडवांस में प्रीमियम दे दिया जाता है। ऐसे में दोनों योजनाओं की तुलना और उन्हें आपस में लिंक करना, कैसे हो सकता है।

सीजीएचएस एंपैनलमेंट से हट रहे निजी अस्पताल

सीजीएचएस लाभार्थियों को पहले से ही अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई वेलनेस सेंटरों पर डॉक्टरों और दूसरे स्टाफ की कमी है। पर्याप्त दवाएं और संसाधन भी नहीं हैं। सीजीएचएस अस्पतालों में कैशलेस इलाज के लिए मना कर दिया जाता है। कई जगहों पर ओवरचार्ज वसूला जाता है। ऐसे प्राइवेट अस्पताल, जहां पर मल्टीस्पेशलिटी सुविधाएं हैं, वे खुद को सीजीएचएस एंपैनलमेंट से हटा रहे हैं। श्रीकुमार ने अपने पत्र में लिखा, ऐसे में सीजीएचएस आईडी कार्ड को भारत सरकार के आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते (एबीएचए) से जोड़ना, घाव पर नमक छिड़कने जैसा है।

कार्यालय ज्ञापन को वापस लिया जाए

यह भारत सरकार का एक सोचा समझा कदम है। इसके जरिए सरकारी कर्मियों पर यह दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है कि वे केवल सरकारी अस्पतालों में ही इलाज कराएं। कर्मचारी, सीजीएचएस एंपैनलमेंट अस्पतालों को अलविदा कह दें। ऐसे में श्रीकुमार ने स्वास्थ्य मंत्रालय से आग्रह किया है कि 28 मार्च को जारी उस कार्यालय ज्ञापन को वापस लिया जाए, जिसमें सीजीएचएस आईडी कार्ड को भारत सरकार के आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाते से जोड़ने की बात कही गई है। साथ ही इस मामले को लेकर स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद (जेसीएम) की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक बुलाई जाए। उसमें कर्मियों के सभी पक्षों को सुना जाए।

 

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था ये मैसेज

गत वर्ष सोशल मीडिया पर व्हाट्सएप चैट (मैसेज) का एक स्क्रीनशॉट खूब वायरल हुआ था। उसमें यह बात कही गई थी कि सीजीएचएस और आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट को जोड़ा जा रहा है। उस मैसेज के जरिए लाभार्थियों में कई तरह की भ्रांतियां फैल रही थीं। जैसे, सरकार वह कदम क्यों उठाना चाह रही है। क्या उस आदेश से सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज का कोई नियम बदला जाना था। उस वक्त केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए मैसेज का खंडन किया था। पीआईबी फैक्ट चेक ने सीजीएचएस आईडी को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट की आईडी से जोड़ने के वायरल दावे को खारिज कर दिया था। उसे पूरी तरह से फर्जी बताया था। अब भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना महानिदेशालय द्वारा 28 मार्च को कार्यालय ज्ञापन जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि सीजीएचएस और आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट को लिंक किया जाए।




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