Home Breaking News आज का शब्द: आवर्त और अष्टभुजा शुक्ल की कविता- वह पहली साँस में लहर दूसरी में भँवर बन जाती

आज का शब्द: आवर्त और अष्टभुजा शुक्ल की कविता- वह पहली साँस में लहर दूसरी में भँवर बन जाती

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आज का शब्द: आवर्त और अष्टभुजा शुक्ल की कविता- वह पहली साँस में लहर दूसरी में भँवर बन जाती

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                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- आवर्त, जिसका अर्थ है- पानी का भँवर, ऐसा बादल जिससे पानी न बरसे। प्रस्तुत है अष्टभुजा शुक्ल की कविता- वह पहली साँस में लहर दूसरी में भँवर बन जाती
                                                                 
                            

बचपन में 
वर्णमाला सीखने की 
ऐसी लगन थी उसके भीतर 
कि वह अपनी उँगली को 
क़लम बना लेती 
और ज़मीन को काग़ज़ 

इतनी अलंकार प्रिय थी 
कि बबूल के फलों को मोड़ कर 
कलाई में कंगन की तरह डाल लेती 
महुए के फूलों को गूँथ कर मटरमाला पहनती 
भूने चने को छील कर 
सोने के लॉकेट की तरह 
पहनने के बारे में सोचती 

वह पहली साँस में लहर 
दूसरी में भँवर 
और तीसरी में आवर्त बन जाती। 

लोग उसे चावल की तरह टोना चाहते 
लेकिन वह धान के आवरण की तरह अनुभूति कराती 
जो उसे कमल का फूल समझ कर पकड़ना चाहता 
मंगुर मछली की तरह डंक मारकर उसके हाथों से छूट जाती 
कैमरों के सामने अक्सर अपना पंजा फैला देती 
बोलते-बोलते चुप हो जाती 
और चुप रहते-रहते बोलने लगती 

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8 घंटे पहले

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