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MHA: शत्रु संपत्ति के लिए पदेन उप संरक्षक के रूप में काम करेंगे सभी जिला मजिस्ट्रेट, सरकार ने जारी की अधिसूचना

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MHA: शत्रु संपत्ति के लिए पदेन उप संरक्षक के रूप में काम करेंगे सभी जिला मजिस्ट्रेट, सरकार ने जारी की अधिसूचना

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All DMs to work as ex-officio deputy custodians of enemy property: Govt

गृह मंत्रालय (सांकेतिक तस्वीर)
– फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार


केंद्र सरकार ने गुरुवार को कहा कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) अपने संबंधित जिलों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों में शत्रु संपत्ति के लिए पदेन उप संरक्षक के रूप में काम करेंगे। वे शत्रु संपत्ति अधिनियम के तहत अपने दायित्वों को निभाएंगे। 

  

एक अधिसूचना में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के उप विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों के पदेन सहायक संरक्षण के रूप में काम करेंगे। अधिसूचना के मुताबिक, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (राजस्व) राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के दायरे में आने वाले क्षेत्रों के लिए शत्रु संपत्ति के पदेन उप संरक्षक के रूप में काम करेंगे। 

 

इसी तरह मुंबई, कोलकाता और लखनऊ में शत्रु संपत्ति के संरक्षक के शाखा कार्यालयों में तैनात उप सचिव संबंधित कार्यालयों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों के लिए शत्रु संपत्ति के पदेन उप संरक्षक के रूप में काम करेंगे। अधिसूचना में कहा गया है कि ये सभी अधिकारी भारत के लिए शत्रु संपत्ति के संरक्षक के निर्देशों और पर्यवेक्षण के तहत काम करेंगे और शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 के तहत अपने दायित्वों को निभाएंगे। 

  

1947 और 1962 के बीच पाकिस्तान और चीन की नागरिकता लेने वाले लोगों द्वारा छोड़ी गई ज्यादातर संपत्ति को शत्रु संपत्ति के रूप में जाना जाता है। भारत ने इन संपत्तियों को ‘भारत के लिए शत्रु संपत्ति के संरक्षक’ के तहत शामिल किया है, जो केंद्रीय गृहमंत्रालय के तहत स्थापित एक कार्यालय है। शत्रु संपत्ति कानून 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के तीन साल बाद लागू किया गया था, ताकि इस तरह की संपत्तियों का नियमन किया जा सके। 

देश में शत्रु संपत्ति कहे जाने वाले कुल 12,611 प्रतिष्ठान हैं, जिनकी कीमत करीब एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होने का अनुमान है। 



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