Home Breaking News अयोध्या: गर्मी ने घटाई श्रद्धालुओं की संख्या, प्राण प्रतिष्ठा के समय दो लाख था आंकड़ा, अब 20 हजार में सिमटा

अयोध्या: गर्मी ने घटाई श्रद्धालुओं की संख्या, प्राण प्रतिष्ठा के समय दो लाख था आंकड़ा, अब 20 हजार में सिमटा

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अयोध्या: गर्मी ने घटाई श्रद्धालुओं की संख्या, प्राण प्रतिष्ठा के समय दो लाख था आंकड़ा, अब 20 हजार में सिमटा

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Ayodhya: Heat reduced the number of devotees, two lakh used to come at the time of Pran Pratistha, now the num

रामपथ पर पसरा सन्नाटा।
– फोटो : अमर उजाला

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प्राण प्रतिष्ठा के बाद भक्तों से गुलजार रहने वाली अयोध्या में इन दिनों भीड़ कम हो गई है। भीषण गर्मी व चटख धूप के चलते श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई है। अप्रैल में ही तापमान 40 डिग्री तक पहुंच गया है। श्रद्धालु घट रहे हैं तो इसका असर कारोबार पर भी पड़ रहा है। हनुमानगढ़ी क्षेत्र में लड्डू प्रसाद की बिक्री कम हो गई है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद जहां रोजाना दो लाख श्रद्धालु हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन कर रहे थे, अब यह संख्या घटकर 20 हजार तक पहुंच गई है।

भीड़ घटने से लड्डू व्यापारी परेशान हैं तो भक्तिपथ पर लगी रेलिंग ने जख्मों पर नमक छि़ड़कने जैसा काम किया है। हालांकि व्यापारियों के विरोध के बाद अब रेलिंग के बीच में चार-चार फीट का गैप दे दिया गया है, जिससे स्थानीय दुकानदारों को काफी हद तक राहत हुई है। वहीं भीड़ कम होने से दुकानदारी 50 फीसदी घट गई है। जो दुकानदार एक-एक दिन में 50 से 60 किलो तक लड्डू बेचते थे वे आठ से दस किलो बेच रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशान वे व्यापारी हैं जिन्होंने भक्तिपथ के चौड़ीकरण के दौरान पगड़ी के रूप में बड़ी रकम देकर किराये पर दुकान ली है। कई दुकानों का किराया 15 से 20 हजार तक है।

घट गया व्यापार

 प्रसाद व्यवसायी लाल जी मोदनवाल ने बताया कि रामनवमी मेले के बाद से अचानक घटी भीड़ के चलते व्यापार भी घट गया है। रोजाना मुश्किल से 5 से 6 किलो लड्डू ही बिक पा रहा है। दुकान का किराया देना मुश्किल हो रहा है।  जितेंद्र मोदनवाल ने बताया कि भीड़ ने तो झटका दिया ही है, भक्तिपथ पर लगी रेलिंग ने उससे बड़ा झटका दिया है। अब रेलिंग के बीच में गैप दे दिया गया है, उससे कुछ स्थिति सुधरी है। श्रद्धालुओं के साथ-साथ कारोबार भी 50 फीसदी घट गया है। बैजनाथ मोदनवाल ने बताया कि कम बिक्री हो रही है तो प्रसाद का निर्माण भी कम मात्रा में किया जा रहा है। एक दिन में जहां 40 से 50 किलो तक प्रसाद बिक जाता था, अब पांच से दस किलो तक प्रसाद बिकना मुश्किल हो जाता है।

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