Home Breaking News Manisha Koirala: संजय ने मुझे यूट्यूब पर ‘नूरजहां’ देखने को कहा था, ऋचा को कहा, देखो मीना कुमारी की ये फिल्म

Manisha Koirala: संजय ने मुझे यूट्यूब पर ‘नूरजहां’ देखने को कहा था, ऋचा को कहा, देखो मीना कुमारी की ये फिल्म

0
Manisha Koirala: संजय ने मुझे यूट्यूब पर ‘नूरजहां’ देखने को कहा था, ऋचा को कहा, देखो मीना कुमारी की ये फिल्म

[ad_1]

नेपाल को तीन प्रधानमंत्री देने वाले कोइराला परिवार की लाडली मनीषा का बचपन काशी में और कैशोर्य दिल्ली में पढ़ाई करते बीता। महज 21 साल की उम्र में वह शोमैन सुभाष घई की फिल्म ‘सौदागर’ की हीरोइन बनीं। लेकिन, मनीषा की किस्मत बदली फिल्म ‘1942 ए लव स्टोरी’ में अंग्रेजों के खिलाफ बगावत करने वाली युवती रज्जो के किरदार से। उन दिनों संजय लीला भंसाली निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा के सहायक हुआ करते थे। बताते हैं कि फिल्म के सारे गीत संजय के निर्देशन में ही तैयार हुए थे। मनीषा एक बार फिर अंग्रेजों से मोर्चा ले रही हैं, उसी कालखंड की एक और कहानी ‘हीरामंडी’ में और एक बार फिर काम कर रही हैं अपने सबसे पसंदीदा निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ। मनीषा कोइराला से ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने ये खास बातचीत की।

Samantha Ruth: ‘मानसिक सेहत पर जागरुकता फैलाना मुश्किल, सिर्फ मनोरंजन में है फैंस की दिलचस्पी’, बोलीं सामंथा




वेब सीरीज ‘हीरामंडी’ का कालखंड वही है जो आपने कोई तीन दशक पहले फिल्म ‘1942 ए लव स्टोरी’ में जीया था। तब संजय लीला भंसाली निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा के सहायक हुआ करते थे और एक बार फिर आप भंसाली के साथ वैसा ही कुछ बागी किरदार करने जा रही हैं?

उन दिनों की यादें अब भी ताजा हैं और जितना अच्छा वह दौर था, वैसा ही हसीन ये दौर भी है। फिल्म ‘1942 ए लव स्टोरी’ में मेरा किरदार रज्जो शुरू से ही अंग्रेजों के खिलाफ बगावत में शामिल रहता है, यहां हम ‘हीरामंडी’ की दुनिया में भीगे हुए थे। ये सही है कि इसमें भी अंग्रेजों के खिलाफ बगावत की बात है लेकिन वह कहानी के उपसंहार के करीब ज्यादा उभरकर सामने आती है। और, इस दौरान संजय का जो विकास बतौर निर्देशक हुआ है, वह तो पूरी दुनिया ने देखा ही है।


लेकिन, रज्जो को देखकर दर्शकों को उससे प्यार हो गया था, यहां मल्लिका जान के किरदार से तो डर लग रहा है..

जी, मुझे भी डर लग रहा था। मैंने ऐसा किरदार पहले कभी नहीं किया है। और, मुझे मालूम नहीं था कि मैं कैसे करूंगी, लेकिन इतना मालूम था कि मैं जान दे दूंगी, जान लगा दूंगी और जो भी संजय हमसे करवाना चाहते थे, वह एकदम पूरे समर्पण के साथ करूंगी। ये बहुत, बहुत, बहुत ही नया किरदार है मेरे लिए।


‘हीरामंडी’ को अगर अगर संजय लीला भंसाली ने सिर्फ दो ढाई घंटे की फिल्म के रूप में बनाया होता तो बेहतर होता या कि सीरीज ही इस कहानी के लिए बेहतर है?

मुझे लगता है कि हर विषय को विस्तार देकर वेब सीरीज के रूप में बनाया जा सकता है। लेकिन, उस विषय में उतनी क्षमता भी होनी चाहिए। ‘हीरामंडी’ में बहुत सारी कहानियां हैं। एक तो इसका जो मुख्य विषय है, वह है ही, और भी बहुत सारी क्षेपक कथाएं हैं। और, ये सब बहुत ही नाटकीय, बहुत रोचक और बहुत जिंदादिल कहानियां हैं। मुझे लगता है कि ‘हीरामंडी’ सिर्फ एक सीजन ही नहीं, इसमें कई सीजन तक आगे जाने की सामग्री है।


हिंदी सिनेमा में मुस्लिम सामाजिक फिल्मों का लंबा दौर रहा है। ऐसे विषयों पर बनी तमाम फिल्में मसलन ‘मुगले ए आजम’, ‘चौदहवीं का चांद’, ‘मेरे हुजूर’ सुपरहिट रही हैं। आपको कौन कौन सी ऐसी फिल्में याद आईं ये सीरीज करते समय?

मैंने बहुत सारी पिक्चरें इस तरह की देखी हैं लेकिन खास इस सीरीज के लिए मैंने कोई फिल्म नहीं देखी। हालांकि, संजय का मेरे लिए निर्देश था कि मैं फिल्म ‘नूरजहां’ का थोड़ा सा हिस्सा यूट्यूब पर देख लूं। संजय की ये बात कहीं मेरे दिमाग में, मेरे जहन में बनी रही। बस, मैंने उतना ही संदर्भ पुरानी फिल्मों का अपने किरदार मल्लिका जान में रहने दिया। बाकी उस दौर की फिल्में हैं, वे मैंने अपने इस किरदार को निभाने के लिए विशेष रूप से नहीं देखीं।


[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here