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'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अवगत, जिसका अर्थ है- विदित, ज्ञात, जाना हुआ, मालूम। प्रस्तुत है अनुज लुगुन की कविता- हम खड़े हैं निरंजना के तट पर
एक
हम खड़े हैं निरंजना के तट पर
हम सदी के उस मुहाने पर खड़े हैं
जहाँ से हम देख रहे हैं
महाबोधि के झड़ते हुए पत्तों को
हम अंतर्विरोधों के साये में हैं
एक तरफ़ निरंजना है तो दूसरी तरफ़ कलिंग
एक में ही दोनों हैं
दोनों तरफ़ समर्थन भी है और विरोध भी
बुद्ध होते तो शायद कहते
यह दुःख का कारण है
सम्यक् नज़रिए का त्याग
कभी फलदायी नहीं हो सकता
हम निरंजना के तट पर देख रहे हैं यह सब
हम देख रहे हैं आस-पास के बिखरे हुए दुःख
हम दुःख समेटते-समेटते बिखर रहे हैं
हम बिखरे हुए दुखों को समेटने के लिए फिर खड़े हो रहे हैं
जैसे वह बढ़ आया था निरंजना की ओर
हम भी चले आ रहे हैं उसी ओर
जब वह बढ़ आया था
तब उसके मन में न संशय था
न ही अनिश्चितता
वह जानता था
जब सब कुछ त्याग दिया गया हो
तो दुःख कहीं भी जगह नहीं बना सकता
हमारी बातों में भले ही न हो बुद्धत्व की बातें
लेकिन हम जानते हैं उस रास्ते को
उसकी सारी बातों से अवगत
हम खड़े हैं
निरंजना के तट पर साझेदारी के लिए
हम खड़े हैं और
हमारे खड़े होने में ही है हमारा सम्यक् अस्तित्व।
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8 घंटे पहले
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