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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ।
– फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने नकदी संकट से जूझ रहे देश के लिए नए ऋण कार्यक्रम पर चर्चा की। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, रियाद में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की विशेष बैठक के इतर बैठक में शरीफ ने आईएमएफ से तीन अरब अमेरिकी डॉलर की अतिरिक्त व्यवस्था (एसबीए) हासिल करने में पाकिस्तान को समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया।
राज्य संचालित पीटीवी न्यूज ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, शहबाज शरीफ और जॉर्जीवा के फिर से चुने जाने बाद से यह पहली बैठक थी। वे आखिरी बार जून 2023 में पेरिस में नए वैश्विक वित्तीय समझौते के लिए शिखर सम्मेलन पर मिले थे। आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड की सोमवार को बैठक होने की उम्मीद है, जिसमें स्टैंडबाय व्यवस्था (एसबीए) के तहत 1.1 अरब डॉलर की अंतिम किस्त पर फैसला लिया जाएगा।
दोनों नेताओं ने आगे कार्यक्रमों पर चर्चा की। जॉर्जीवा ने समीक्षा प्रक्रिया सहित पाकिस्तान के साथ चल रहे ऋण कार्यक्रम पर आईएमएफ के दृष्टिकोण को साझा किया। पाकिस्तान ने पिछले साल जून में आईएमएफ कार्यक्रम में तीन अरब डॉलर हासिल किए थे। जिससे उसे डिफॉल्ट होने से बचने में मदद मिली।
प्रधानमंत्री शरीफ ने डब्ल्यूईएफ की विशेष बैठक के दौरान ‘रिडिफाइनिंग ग्लोबल हेल्थ एजेंडा’ विषय पर एक पैनल चर्चा में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सेवा में वैश्विक असमानता का जिक्र किया। शरीफ ने कहा कि जब वह 2003 में सऊदी अरब गए थे तो वे एक बहुत ही भयानक कैंसर की चपेट में आ गए थे। उन्होंने कहा कि इसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क ले जाया गया और हजारों डॉलर की लागत से सर्जरी करानी पड़ी। उन्होंने कहा, मेरे देश में कितने लोग इस तरह के महंगे उपचार का खर्च उठा सकते हैं, बहत ज्यादा नहीं।
शहबाज ने कहा कि जब वह पाकिस्तान वापस आए, तो उन्हें पंजाब प्रांत का मुख्यमंत्री चुना गया और उनकी सरकार ने किडनी व लीवर की बीमारियों के साथ-साथ कैंसर में विशेषज्ञता वाले अस्पताल बनाए। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि आज पहली और सबसे बड़ी समस्या वैश्विक असमानता है। शरीफ ने कहा कि कोरोना महामारी ने इन असंतुलनों और कमियों को उजागर कर दिया।
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