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नागर विमानन मंत्रालय
– फोटो : i-stock
विस्तार
गो फर्स्ट के जिन 54 विमानों का पंजीकरण रद्द किया गया है, उन्हें देश से बाहर उड़ाने में लेसर्स (लीज पर लेने वाली कंपनियां) को अधिक समय लग सकता है। इसकी वजह यह है कि विमानन कंपनी के अधिकतर विमानों को इंजन और स्पेयर पार्ट्स की आवश्यकता है।
2023 में बंद किया था परिचालन
बता दें कि गो फर्स्ट एयरलाइन ने 2 मई 2023 को परिचालन बंद कर दिया था और इस वजह से कंपनी जमीन पर आ गई थी। बताया गया है कि जिस दौरान एयरलाइन ने परिचालन बंद किया था, उस समय 24 विमान उड़ान भरने की स्थिति में थे। इसके अलावा 30 विमान बिना इंजन और स्पेयर पार्ट्स के हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने गो फर्स्ट के 54 विमानों का रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया था। इस तरह से लेसर्स को लीज पर लिए गए विमानों को वापस लेने की अनुमति मिल गई थी।
‘कंपनी का फिर से उभरना मुश्किल’
सूत्रों का कहना है कि विमानन कंपनी का फिर से उभरना मुश्किल लगता है क्योंकि विमानों का पंजीकरण रद्द होने के बाद कंपनी के पास ज्यादा संसाधन नहीं बचे हैं। सूत्रों ने यह भी कहा कि इन 54 विमानों को देश से बाहर उड़ाने में लेसर्स को समय लग सकता है क्योंकि 30 विमानों के इंजन बदलने की आवश्यकता है। इसके अलावा उड़ान के लिए विमानों को कई तरह की स्वीकृतियां लेन होंगी क्योंकि वे बीते एक वर्ष से जमीन पर ही खड़े हैं।
‘30 विमानों को इंजन, स्पेयर पार्ट्स की जरूरत’
हवाई जहाजों को लीज पर देने वाली कंपनी विमान (Vman) के सीईओ विशोक मानसिंह का कहना है कि जब गो फर्स्ट एयरलाइन ने परिचालन बंद किया तो लगभग 24 विमान उड़ान भरने की स्थिति में थे। जुलाई 2023 के बाद से विमानों के रख-रखाव का काम भी नहीं किया गया। इसलिए लेसर्स को इंजन बनाने वाली कंपनियों पीएंडडब्ल्यू और एयरबस से विमानों को देश से बाहर उड़ाने के लिए मंजूरी लेनी होगी। विशोक मानसिंह ने आगे बताया कि कंपनियों से अनुमति मिलने के बाद गो फर्स्ट के विमान न्यूनतम रखरखाव कार्य के साथ उड़ान भर सकते हैं। मंजूरी मिलने के बाद विमानों को तीन से चार सप्ताह में उड़ाया जा सकता है। बाकी बचे 30 विमानों के बारे में मानसिंह ने बताया कि उनमें से अधिकतर विमानों में इंजन और स्पेयर पार्ट्स नहीं हैं। इसलिए उनको उड़ाने में छह महीने या एक साल का समय लग सकता है।
बिना रख-रखाव के जमीन पर खड़े हैं कई विमान
गो फर्स्ट ने 17 वर्षों से अधिक समय तक उड़ान भरने के बाद वित्तीय अस्थिरता की वजह से 3 मई 2023 से परिचालन बंद कर दिया था। इस वजह से कंपनी के कई विमान एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बिना रख-रखाव के जमीन पर ही खड़े हैं।
बता दें कि 26 अप्रैल को दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद डीजीसीए को गो फर्स्ट के 54 विमानों का पंजीकरण रद्द कर दिया था।
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